पीएम मोदी का इंडोनेशिया की संसद में संबोधन: रामायण और महाभारत के साझा रिश्तों पर दिया जोर

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पीएम मोदी का इंडोनेशिया की संसद में संबोधन: रामायण और महाभारत के साझा रिश्तों पर दिया जोर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को एक ऐतिहासिक संबोधन दिया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने इंडोनेशियाई जनता द्वारा मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया के लोगों, वहां के बच्चों, युवाओं और महिलाओं ने आज के दिन को उनके जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बना दिया है। उन्होंने संसद के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके बीच आना उनके लिए बहुत सौभाग्य का विषय है और वह इस पल को हमेशा संजोकर रखेंगे।

सर्वोच्च सम्मान और राष्ट्रपति प्राबोवो से मित्रता

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि आज सुबह उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है। उन्होंने कहा कि वह इस सम्मान को उन अनगिनत भारतीयों के प्रति इंडोनेशियाई लोगों के स्नेह के रूप में विनम्रता और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करते हैं। राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ अपने संबंधों पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने एक दिलचस्प बात साझा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्राबोवो ने कॉपीराइट के बारे में बात की थी, लेकिन प्रेम, स्नेह, दोस्ती और आपसी सम्मान की भावना पर कोई कॉपीराइट नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ उनकी दोस्ती कॉपीराइट की सभी सीमाओं से परे है।

साझा सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत

भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश एक ही महासागर और साझा इतिहास से जुड़े हुए हैं और उन्होंने रामायण, महाभारत और नालंदा का उदाहरण देते हुए बताया कि ये हमारी साझा विरासत के प्रतीक हैं जो हमें आपस में जोड़ते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और हिंद महासागर जैसे नाम ही उन गहरे रिश्तों को दर्शाते हैं जो हमारे बीच मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंडोनेशिया के लोगों ने उनका स्वागत किया है, उसे वह कभी नहीं भूल सकते और यह दोनों देशों के बीच की अटूट मित्रता का प्रमाण है।

लोकतंत्र की शक्ति और विविधता

पीएम मोदी ने भारत को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताया, वहीं इंडोनेशिया को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी डेमोक्रेसी के रूप में मान्यता दी। उन्होंने दोनों देशों की विविधताओं में समानताएं बताते हुए कहा कि भारत में सैकड़ों भाषाएं और अनेक परंपराएं हैं, और ठीक वैसा ही स्वरूप इंडोनेशिया में भी देखने को मिलता है। उन्होंने भारत के 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के मंत्र और इंडोनेशिया के 'भिन्नेका तुंगल एक्का' के विचार की तुलना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपनी विविधता को ही अपने लोकतंत्र की एकता की नींव बनाया है।

आर्थिक उपलब्धियां और गरीबी उन्मूलन

भारत की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि पिछले दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया जैसे लोकतांत्रिक देश साथ खड़े होते हैं, तो पूरी दुनिया का यह भरोसा और मजबूत होता है कि लोकतंत्र के माध्यम से विकास के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं और बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी

द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों को साझा करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि पिछले साल दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इंडोनेशिया में वर्तमान में 100 से ज्यादा भारतीय कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के सबसे युवा समाजों में से हैं और समुद्री ताकत के मामले में भी दोनों का बहुत महत्व है। उन्होंने दोनों देशों को भविष्य के लिए स्वाभाविक साझेदार और 'ग्लोबल साउथ' की एक मजबूत आवाज बताया।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश इस चुनौती के खिलाफ हमेशा एक साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से पिछले साल भारत के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जिक्र किया और कहा कि उस समय इंडोनेशिया मजबूती से भारत के साथ खड़ा रहा था, जिसके लिए वह आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश 'संयुक्त कार्य समूह' (Joint Working Group) के माध्यम से आतंकवाद-रोधी प्रयासों पर निरंतर मिलकर काम कर रहे हैं और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।

ब्रिक्स और वैश्विक मंच पर सहयोग

पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग की चर्चा करते हुए कहा कि पिछले साल इंडोनेशिया ब्रिक्स (BRICS) का पूर्ण सदस्य बना है और इस साल भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर ब्रिक्स प्लेटफॉर्म को अधिक व्यावहारिक, संतुलित और 'ग्लोबल साउथ' की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका को और मजबूत करेगी।

गंगा-महाकम विजन और सभ्यता संवाद

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने 'गंगा-महाकम विजन' का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यह विजन हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान की जरूरतों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और साझा प्रगति का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। उन्होंने साझा इतिहास को भविष्य की ताकत बनाने पर जोर दिया और कहा कि रामायण से लेकर बोरोबुदुर तक की हमारी विरासत को नई पीढ़ी की सोच से जोड़ना होगा और इसके लिए उन्होंने 'भारत-इंडोनेशिया सभ्यता संवाद' (India-Indonesia Civilisation Dialogue) शुरू करने का आह्वान किया ताकि सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।

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