प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान 13000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक परिदृश्य में भले ही सरकारें बदलती रही हों, लेकिन तमिलनाडु के विकास और यहां की जनता की सेवा करने का उनका व्यक्तिगत संकल्प हमेशा अडिग रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये परियोजनाएं न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ परियोजनाएं दैनिक यात्रा को सुगम बनाएंगी, जबकि कुछ उद्योग और व्यापार को नई शक्ति प्रदान करेंगी।
विकास की निरंतरता और मुख्यमंत्रियों के साथ समन्वय
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास और विभिन्न मुख्यमंत्रियों के साथ अपने कार्य संबंधों को याद किया और उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें करुणानिधि और जयललिता जैसे दिग्गज नेताओं के साथ संवाद करने के कई महत्वपूर्ण अवसर मिले। प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद, उन्होंने जयललिता, ओ और पन्नीरसेल्वम, ई. के. स्टालिन के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वह वर्तमान मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के साथ तमिलनाडु की विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, नेतृत्व में बदलाव के बावजूद केंद्र सरकार का लक्ष्य हमेशा तमिलनाडु की प्रगति सुनिश्चित करना रहा है और वे इसी भावना के साथ राज्य के साथ खड़े हैं।
शासन के 25 वर्ष और सहकारी संघवाद का मंत्र
प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देशवासियों के आशीर्वाद और प्रेम से उन्होंने सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उनकी यह यात्रा अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक, जनता ने उन्हें पहले मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने का सौभाग्य दिया है। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों के सफर में लोकतंत्र की दो प्रमुख शक्तियों—देश की जनता और सहकारी संघवाद—में उनका विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। उनका मानना है कि राज्यों का विकास ही पूरे देश के विकास का असली आधार है और इसी मंत्र के साथ वे आगे बढ़ रहे हैं।
शहरी विकास और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार
तमिलनाडु में शहरी विकास को अपनी प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शहरीकरण को एक चुनौती के बजाय एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक परिवहन शहरी जीवन को आसान बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। चेन्नई मेट्रो के विस्तार का जिक्र करते हुए उन्होंने आंकड़ों के जरिए प्रगति को दर्शाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का मेट्रो नेटवर्क लगभग 250 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर 1100 किलोमीटर से अधिक हो गया है। चेन्नई में मेट्रो की नई लाइन के उद्घाटन से यात्रियों को बेहतर और आधुनिक परिवहन सुविधाएं मिलेंगी, जिससे शहर की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
बंदरगाहों की दक्षता और वैश्विक व्यापार में वृद्धि
प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री व्यापार और बंदरगाहों की कार्यप्रणाली में आए सुधारों पर भी प्रकाश डाला और उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बंदरगाहों की गति और दक्षता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जहाजों के टर्नअराउंड टाइम, यानी बंदरगाह पर आने और वहां से रवाना होने के समय को आधा कर दिया गया है। इस सुधार से निर्यातकों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिला है। बंदरगाहों की बेहतर कार्यप्रणाली के कारण अब भारत के उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पहुंच रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।
विकसित तमिलनाडु से विकसित भारत का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसे तमिलनाडु के निर्माण का आह्वान किया जो निरंतर नई ऊंचाइयों को छुए। उन्होंने राज्य की जनता को आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की हर संभव मदद के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर विकसित तमिलनाडु से विकसित भारत के संकल्प को साकार करना है। प्रधानमंत्री ने इन सभी परियोजनाओं के लिए तमिलनाडु की जनता को शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि ये पहल राज्य के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगी।