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पीएम मोदी का इजराइल दौरा: रक्षा समझौतों और आधुनिक हथियारों पर केंद्रित

पीएम मोदी का इजराइल दौरा: रक्षा समझौतों और आधुनिक हथियारों पर केंद्रित
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर हो रही है। आठ साल के अंतराल के बाद हो रही यह यात्रा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस दौरे का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना और भविष्य की सैन्य तकनीकों पर सहयोग बढ़ाना है। भारत और इजराइल के बीच पहले से ही कई रक्षा समझौते प्रभावी हैं, और इस यात्रा के दौरान नई रक्षा प्रणालियों की खरीद और संयुक्त विकास पर चर्चा होने की उम्मीद है।

मिसाइल और हवाई सुरक्षा प्रणालियों में साझेदारी

भारत और इजराइल के बीच रक्षा सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ मिसाइल और हवाई सुरक्षा प्रणाली है। भारतीय नौसेना वर्तमान में बराक-1 मिसाइल का उपयोग कर रही है, जो कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली नौसैनिक मिसाइल है। इसके अतिरिक्त, बराक-8 मिसाइल प्रणाली को भारत और इजराइल ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। यह एक मध्यम से लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसका उपयोग भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना द्वारा किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली 70-100 किलोमीटर की सीमा के भीतर दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, एंटी-शिप मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने में सक्षम है। यह प्रणाली अरब सागर और हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की रक्षात्मक क्षमता को मजबूती प्रदान करती है।

एंटी-टैंक मिसाइल और सीमा निगरानी तकनीक

भारतीय सेना इजराइल की तीसरी और चौथी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग करती है। इन मिसाइलों की विशेषता यह है कि इन्हें सैनिकों द्वारा कंधे पर रखकर, वाहनों से या हेलीकॉप्टरों से दागा जा सकता है और इनमें 'फायर, ऑब्जर्व एंड अपडेट' की क्षमता होती है और इनकी मारक क्षमता 2-4 किलोमीटर तक है। इसके साथ ही, भारत इजराइल की एडवांस्ड बॉर्डर मॉनिटरिंग सिस्टम तकनीक का भी उपयोग कर रहा है। इसमें स्मार्ट फेंसिंग, ग्राउंड सेंसर, थर्मल इमेजर्स और रडार शामिल हैं। यह एकीकृत प्रणाली कठिन मौसम और रात के समय में भी घुसपैठ की सटीक जानकारी देने में सक्षम है, जिससे सीमा सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और साइबर सुरक्षा

रक्षा साझेदारी केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी शामिल हैं। भारत ने इजराइल से कई एयर-सर्विलांस और फायर-कंट्रोल रडार प्राप्त किए हैं, जो वर्तमान में भारतीय वायु रक्षा नेटवर्क का अभिन्न अंग हैं। ये रडार कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम हैं। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के विमान इजराइली इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और जैमर से लैस हैं। ये सिस्टम दुश्मन के रडार को भ्रमित करने और पायलटों को मिसाइल हमले की समय पर चेतावनी देने का कार्य करते हैं। आगामी यात्रा में एआई-संचालित युद्ध प्रणालियों और साइबर सुरक्षा ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।

ड्रोन और निगरानी प्रणालियों का विस्तार

निगरानी और सटीक हमलों के लिए भारत इजराइल के हेरोन और सर्चर यूएवी (मानवरहित विमान) का उपयोग करता है। हेरोन ड्रोन मध्यम ऊंचाई पर लंबी अवधि तक उड़ान भरने में सक्षम है, जबकि सर्चर एक हल्का निगरानी ड्रोन है। ये ड्रोन वास्तविक समय में वीडियो और इमेज इंटेलिजेंस एकत्र करने की क्षमता रखते हैं, जो चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान अधिक उन्नत ड्रोन और 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (आत्मघाती ड्रोन) की खरीद पर बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह तकनीक आधुनिक युद्धक्षेत्र में सैनिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करती है।

मेक इन इंडिया और तकनीक हस्तांतरण

भारत और इजराइल के बीच रक्षा संबंधों का एक नया आयाम 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत तकनीक हस्तांतरण है। भारत अब केवल तैयार हथियारों के आयात के बजाय देश के भीतर ही उनके उत्पादन पर जोर दे रहा है। डीआरडीओ और इजराइली रक्षा कंपनियां मिलकर कई प्रणालियों का विकास कर रही हैं। भारत का लक्ष्य इजराइल के उस मॉडल को अपनाना है जिसमें सेना और अनुसंधान संस्थान मिलकर नवाचार करते हैं। इस सहयोग के माध्यम से भारत अपने डिफेंस कॉरिडोर में विदेशी निर्भरता को कम करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

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