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पीएम मोदी: सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड

पीएम मोदी: सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है और वह भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख (Head of Government) के रूप में सेवा करने वाले नेता बन गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने संयुक्त कार्यकाल में कुल 8,931 दिन पूरे कर लिए हैं। इस मील के पत्थर के साथ, उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने 8,930 दिनों तक सरकार के प्रमुख के रूप में कार्य किया था। यह उपलब्धि उनके निरंतर नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन में उनकी लंबी पारी को रेखांकित करती है।

पवन कुमार चामलिंग के रिकॉर्ड का ऐतिहासिक संदर्भ

सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के नाम अब तक भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड दर्ज था। चामलिंग ने 12 दिसंबर 1994 से 27 मई 2019 तक लगातार 24 वर्षों से अधिक समय तक सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल की कुल अवधि 8,930 दिन थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब इस आंकड़े को पार कर लिया है और यदि केवल मुख्यमंत्री के कार्यकाल की बात की जाए, तो चामलिंग अभी भी शीर्ष पर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के संयुक्त कार्यकाल के मामले में नरेंद्र मोदी अब देश के पहले नेता बन गए हैं। इस सूची में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु का नाम भी प्रमुखता से आता है, जिन्होंने 23 वर्षों से अधिक समय तक राज्य की कमान संभाली थी।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 13 वर्षों का कार्यकाल

नरेंद्र मोदी की सरकार के प्रमुख के रूप में यात्रा 7 अक्टूबर 2001 को शुरू हुई थी, जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने केशुभाई पटेल के स्थान पर राज्य की कमान संभाली और उसके बाद लगातार तीन विधानसभा चुनावों (2002, 2007 और 2012) में भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाई। वह 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, जो लगभग 12 साल और 227 दिनों का समय था। उनके इस कार्यकाल के दौरान गुजरात में प्रशासनिक सुधार और आर्थिक विकास के कई मॉडल पेश किए गए, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मिली। वह गुजरात के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री भी हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय नेतृत्व और तीन कार्यकाल

2014 के लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत के बाद, नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2014, 2019 और अब 2024 के आम चुनावों में लगातार तीन बार बहुमत हासिल किया है। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने अब 10 वर्ष और कई महीनों का समय पूरा कर लिया है। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार चुनावी जीत हासिल कर प्रधानमंत्री बनने वाले दूसरे नेता हैं और उनके प्रधानमंत्री काल के दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत निर्णय लिए गए हैं, जिनमें जीएसटी लागू करना, अनुच्छेद 370 का निरसन और डिजिटल इंडिया जैसे अभियान शामिल हैं।

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक पृष्ठभूमि का विस्तार

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने शुरुआती जीवन में काफी संघर्ष किया और अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने में मदद की। 1970 के दशक में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और एक प्रचारक के रूप में कार्य किया। 1980 के दशक के उत्तरार्ध में उन्हें भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं। 1995 और 1998 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत में उनकी संगठनात्मक रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वह स्वतंत्रता के बाद पैदा होने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री भी हैं, जो उनके नेतृत्व को एक नई पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है।

संसदीय लोकतंत्र में निरंतरता और प्रशासनिक अनुभव

नरेंद्र मोदी के पास मुख्यमंत्री के रूप में लंबा अनुभव होने के कारण, वह देश के उन प्रधानमंत्रियों में शामिल हैं जिनके पास राज्य स्तर पर सरकार चलाने का व्यापक पूर्व अनुभव रहा है। उनके 8,931 दिनों के इस सफर में प्रशासनिक निरंतरता एक प्रमुख कारक रही है। उनके कार्यकाल के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं और वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। आंकड़ों के अनुसार, उनके नेतृत्व में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास, कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार और तकनीकी नवाचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक स्थिरता के एक नए युग को भी दर्शाता है।

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