प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच दिवसीय विदेश यात्रा के दूसरे पड़ाव पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बाद नीदरलैंड पहुंच चुके हैं। यह उनकी नीदरलैंड की दूसरी आधिकारिक यात्रा है, इससे पहले वह जून 2017 में यहां आए थे। उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, हरित हाइड्रोजन, नवाचार और तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई बड़े समझौते होंगे। पीएम मोदी की इस यात्रा के बीच यह समझना जरूरी है कि यूरोप का यह छोटा सा देश आखिर इतना ताकतवर और अमीर कैसे बना कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी इसे सम्मान और गंभीरता के साथ देखती हैं।
नीदरलैंड की आर्थिक शक्ति का रहस्य
नीदरलैंड यूरोप का एक ऐसा देश है जिसके पास जमीन तो कम है, लेकिन उसकी कमाई बहुत बड़ी है। 23 ट्रिलियन डॉलर रही है। 45 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। नीदरलैंड की इस सफलता के पीछे उसकी प्राकृतिक संपदा, आधुनिक तकनीक और व्यापारिक सूझबूझ का बड़ा हाथ है। इस देश ने अपनी हर चुनौती और संसाधन को कमाई के जरिए में बदल दिया है।
प्राकृतिक गैस: समृद्धि की मजबूत बुनियाद
नीदरलैंड की संपन्नता में प्रकृति के दिए एक खास तोहफे का बड़ा योगदान है और वह है प्राकृतिक गैस और यह देश लंबे समय तक पूरे यूरोप में गैस उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। विशेष रूप से ग्रोनिंगन गैस क्षेत्र ने नीदरलैंड की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस गैस से न केवल देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हुईं, बल्कि सरकार को भारी राजस्व भी मिला। इसी कमाई के दम पर नीदरलैंड ने अपने बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों, बंदरगाहों और सामाजिक सुविधाओं में भारी निवेश किया। हालांकि अब भूकंपीय चिंताओं के कारण उत्पादन को सीमित किया गया है, लेकिन इसने देश की आर्थिक नींव को बहुत मजबूत बना दिया है।
रॉटरडैम बंदरगाह: यूरोप का प्रवेश द्वार
नीदरलैंड की कमाई का एक और विशाल स्रोत रॉटरडैम पोर्ट है। यह यूरोप का सबसे बड़ा और दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। दुनिया भर से आने वाले जहाज, तेल, गैस, मशीनें और खाद्य सामग्री इसी बंदरगाह के जरिए यूरोप के अन्य देशों तक पहुंचती हैं। इसे यूरोप का गेटवे भी कहा जाता है। इस बंदरगाह से होने वाले व्यापार, लॉजिस्टिक्स और टैक्स से नीदरलैंड को अरबों डॉलर की आय होती है। साथ ही, यह लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था निरंतर गतिशील बनी रहती है।
ट्यूलिप की खेती और पर्यटन का संगम
नीदरलैंड का नाम आते ही आंखों के सामने ट्यूलिप के खूबसूरत फूलों के खेत आ जाते हैं। लेकिन ये फूल सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं हैं, बल्कि यह एक बहुत बड़ा व्यापार है। नीदरलैंड हर साल करोड़ों फूलों और उनके बीजों का निर्यात पूरी दुनिया में करता है। ट्यूलिप के सीजन में दुनिया भर से लाखों पर्यटक नीदरलैंड पहुंचते हैं, जिससे वहां के होटल, रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों की जबरदस्त कमाई होती है। इस तरह एक फूल वहां खेती, व्यापार और पर्यटन तीनों का मुख्य आधार बना हुआ है।
ग्रीन हाउस खेती और आधुनिक तकनीक
नीदरलैंड ने खेती को विज्ञान के साथ जोड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। यहां की ग्रीन हाउस खेती दुनिया में सबसे उन्नत मानी जाती है। कम जमीन होने के बावजूद, नीदरलैंड आधुनिक तकनीक और नियंत्रित वातावरण का उपयोग करके भारी मात्रा में सब्जियां और फल पैदा करता है। टमाटर, शिमला मिर्च और खीरा जैसी फसलों के उत्पादन में यह देश अग्रणी है। यहां सेंसर आधारित सिंचाई और डेटा आधारित खेती की जाती है, जिससे पानी की बचत होती है और पैदावार कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि नीदरलैंड कृषि निर्यात के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है।
डेयरी उद्योग, जल प्रबंधन और भारत के साथ व्यापार
नीदरलैंड का डेयरी कारोबार भी बहुत मजबूत है। यहां के दूध, पनीर और मक्खन की मांग पूरी दुनिया में है। इसके अलावा, नीदरलैंड का एक बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे है, जिसे बचाने के लिए उन्होंने दुनिया का सबसे बेहतरीन जल प्रबंधन सिस्टम विकसित किया है। आज नीदरलैंड अपनी इस इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को दूसरे देशों को बेचकर भी कमाई करता है। भारत के लिए नीदरलैंड एक अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 से 28 बिलियन डॉलर यानी करीब 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है। नीदरलैंड भारत के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य और चौथा सबसे बड़ा निवेशक देश है। भारत वहां मुख्य रूप से रिफाइंड ऑयल और दवाएं भेजता है, जबकि वहां से आधुनिक मशीनरी और कृषि तकनीक भारत आती है।