ताशकंद में पीएम मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि, किर्गिजस्तान के लिए हुए रवाना

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ताशकंद में पीएम मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि, किर्गिजस्तान के लिए हुए रवाना
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी उज्बेकिस्तान की आधिकारिक यात्रा के दौरान राजधानी ताशकंद में भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शास्त्री मेमोरियल पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उस महान नेता की विरासत को याद किया जिनका भारतीय इतिहास में अमूल्य योगदान रहा है। ताशकंद में शास्त्री जी का स्मारक भारत और उज्बेकिस्तान के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है, जो विशेष रूप से 1966 की घटनाओं से जुड़ा हुआ है।

लाल बहादुर शास्त्री की विरासत को नमन

विदेश मंत्रालय ने इस श्रद्धांजलि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री का 'जय जवान, जय किसान' का कालजयी नारा आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, शास्त्री जी का जीवन सादगी, साहस और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण था और उल्लेखनीय है कि भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का 11 जनवरी 1966 को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में अचानक निधन हो गया था। यह दुखद घटना 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही घंटों बाद हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा शास्त्री जी के बलिदान और उनके नेतृत्व के प्रति भारत के सम्मान को दर्शाता है।

संयुक्त वृक्षारोपण समारोह

पर्यावरण संरक्षण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कुक्सारॉय राष्ट्रपति भवन के बगीचे में संयुक्त रूप से एक पेड़ लगाया और यह वृक्षारोपण भारत की 'एक पेड़ मां के नाम' पहल और उज्बेकिस्तान के 'यशिल माकोन' (ग्रीन) प्रयासों के तहत किया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम एक हरित और अधिक टिकाऊ भविष्य को संवारने के प्रति भारत और उज्बेकिस्तान की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है और यह समारोह प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद संपन्न हुआ।

द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी पर व्यापक चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस चर्चा में निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे:

  • व्यापार और निवेश
  • नवाचार और स्टार्ट-अप
  • डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और UPI
  • रक्षा और सुरक्षा
  • स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स
  • महत्वपूर्ण खनिज
  • कृषि और शिक्षा
  • पर्यटन और अंतरिक्ष
  • लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान
दोनों नेताओं ने अपनी द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक ले जाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इसके साथ ही, दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक 5 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की। आर्थिक और निवेश संबंधों को और अधिक गहरा करने के लिए एक व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने का भी आह्वान किया गया।

किर्गिजस्तान के लिए प्रस्थान और SCO शिखर सम्मेलन

उज्बेकिस्तान का अपना दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब किर्गिजस्तान के लिए रवाना हो गए हैं। वह आज बिश्केक पहुंचेंगे, जहां वह 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिजस्तान में रहेंगे। इस शिखर सम्मेलन के दौरान वह क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और अन्य महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मुद्दों पर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।

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