प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर।

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
प्रह्लाद जोशी को मिला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर।
विज्ञापन

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में एक बड़े फेरबदल के तहत, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह निर्णय धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद लिया गया है और अब शिक्षा मंत्रालय के कामकाज की पूरी जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्रालय विभिन्न चुनौतियों और छात्र आंदोलनों का सामना कर रहा है। प्रह्लाद जोशी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपकर सरकार ने प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया है।

राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफे की मंजूरी और संवैधानिक प्रक्रिया

प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर, भारत के संविधान के आर्टिकल 75 के क्लॉज (2) के तहत, तुरंत प्रभाव से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने निर्देश दिया है कि कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान विभागों के अलावा शिक्षा मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा जाए। यह प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न की गई है।

प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक परिचय और वर्तमान विभाग

प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं और केंद्र सरकार में एक अनुभवी मंत्री के रूप में जाने जाते हैं। शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने से पहले, वे पहले से ही कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वर्तमान में वे उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के केंद्रीय मंत्री हैं और इसके अतिरिक्त, वे इंटरनेशनल सोलर अलायंस के प्रेसिडेंट का पद भी संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी जुड़ने से उनके पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ है और वे सरकार के सबसे व्यस्त मंत्रियों में से एक बन गए हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कारण और पृष्ठभूमि

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा करने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं के बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाने से "देश-विरोधी ताकतों" को रोकने के लिए यह कदम उठाना आवश्यक था। प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार के कार्यकाल में एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है, जहां किसी वरिष्ठ मंत्री ने सड़क पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और भारी राजनीतिक दबाव के कारण अपना पद छोड़ा है।

जंतर-मंतर पर आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी की भूमिका

पिछले लगभग 1 महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की अगुवाई में छात्रों का जोरदार आंदोलन चल रहा था। यह आंदोलन मुख्य रूप से नीट परीक्षा पेपर लीक कांड को लेकर था, जिसमें प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कॉकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट कर दिया था कि प्रधान का इस्तीफा "नॉन-नेगोशिएबल" है और इसे ही आंदोलन की मुख्य मांग बनाया गया था। आज दोपहर जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन समाप्त हो गया। हालांकि, सरकार और CJP के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले ही यह इस्तीफा सामने आया।

नए शिक्षा मंत्री को चेतावनी और भविष्य की चुनौतियां

प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने नए शिक्षा मंत्री को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं ने यह साफ कर दिया है कि जो भी नया शिक्षा मंत्री बनेगा, अगर उसने छात्रों के मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया, तो वे फिर से जंतर-मंतर पर वापस आएंगे। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग सरकार से जवाबदेही की मांग करना जारी रखेगा। अब प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीट परीक्षा से जुड़े विवादों को सुलझाने और छात्रों के बीच सरकार की विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने की होगी।

विज्ञापन