कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए। कांशीराम की पुण्यतिथि से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने दलित राजनीति, जाति जनगणना और देश के आर्थिक ढांचे पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केवल नारे लगाने से बदलाव नहीं आता, बल्कि बदलाव तब होता है जब समाज यह तय कर लेता है कि वह मौजूदा व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार, वर्तमान में समाज को 15% और 85% के बीच बांट दिया गया है, जहां अधिकांश लाभ केवल एक छोटे वर्ग तक सीमित है।
नेहरू और कांशीराम के संदर्भ में बड़ा बयान
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में एक ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि यदि जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। उन्होंने दलित नेता कांशीराम के योगदान को याद करते हुए कहा कि कांग्रेस की विचारधारा हमेशा से समावेशी रही है। राहुल गांधी के अनुसार, बाबासाहेब आंबेडकर ने शिक्षा और संगठित होने पर जोर दिया था, लेकिन आज के समय में पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों को सत्ता के केंद्रों से दूर रखा जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक जाति जनगणना नहीं होती, तब तक इन वर्गों को उनका वास्तविक हक नहीं मिल सकता।
प्रधानमंत्री और अमेरिकी संबंधों पर तीखी टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि वे अब भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने संसद की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे इन मुद्दों को सदन में उठाने जा रहे थे, तब प्रधानमंत्री वहां से चले गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां विदेशी दबाव में बनाई जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से कृषि क्षेत्र और ऊर्जा सुरक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ समझौता किया गया है। उनके अनुसार, रूस से तेल खरीदने और अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भारत के हितों को गौण रखा गया है।
अडानी समूह और वित्तीय ढांचे पर आरोप
राहुल गांधी ने अडानी समूह और भाजपा के बीच संबंधों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने दावा किया कि देश का पूरा वित्तीय ढांचा एक विशेष कंपनी के इर्द-गिर्द सिमट गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चल रहे कानूनी मामलों ने इस सिस्टम की पोल खोल दी है। राहुल गांधी के अनुसार, यह पूरा सिस्टम भाजपा का है और अडानी केवल उसका एक हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने देश का डेटा और महत्वपूर्ण संसाधन विदेशी शक्तियों और निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे इन सभी दावों के सबूत पेश करेंगे।
उत्तर प्रदेश की राजनीति और 2027 का लक्ष्य
लखनऊ में राहुल गांधी का यह दौरा उत्तर प्रदेश की भविष्य की राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की सफलता के बाद, कांग्रेस अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी विचारधारा पर अडिग रहेगी और दलितों, पिछड़ों तथा आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ती रहेगी। उन्होंने भाजपा को एक 'अमीर पार्टी' और कांग्रेस को 'गरीबों की पार्टी' करार दिया। उनके अनुसार, भाजपा के पास धनबल है, लेकिन कांग्रेस के पास विचारधारा की शक्ति है जो उसे कमजोर नहीं होने देगी।
बसपा का प्रभाव और राजनीतिक चुनौतियां
उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर चल रही खींचतान के बीच राहुल गांधी का यह दौरा बसपा के प्रभाव को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा का जमीनी संगठन अभी भी सक्रिय है। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, मायावती के नेतृत्व में बसपा का कोर वोटर फिर से एकजुट हो रहा है, जो कांग्रेस और सपा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस के सामने कई संगठनात्मक चुनौतियां हैं, लेकिन उन्होंने दावा किया कि भाजपा मनोवैज्ञानिक रूप से अपनी पकड़ खो रही है।