राम मंदिर चंदा चोरी: 8 आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी, टिन्नू के घर से गहने और दस्तावेज बरामद

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राम मंदिर चंदा चोरी: 8 आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी, टिन्नू के घर से गहने और दस्तावेज बरामद
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उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार को राम मंदिर में दान के गबन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए सभी आठ लोगों के आवासों पर एक साथ छापेमारी की और पुलिस की टीम ने स्थानीय मजिस्ट्रेटों के साथ मिलकर लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामाशंकर यादव सहित अन्य आरोपियों के घरों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद हुई हैं, जो इस मामले की जांच में अहम कड़ी साबित हो सकती हैं। पुलिस की यह कार्रवाई मंदिर में हुए वित्तीय अनियमितताओं की तह तक जाने के उद्देश्य से की गई है।

छापेमारी और बरामदगी का विवरण

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में शामिल सभी 8 आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस ने एक साथ दबिश दी। विशेष रूप से राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर हुई छापेमारी में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। टिन्नू के घर से पुलिस ने कुछ ज्वैलरी और महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए हैं। इसके अलावा, पुलिस को वहां से कुछ कैश और प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन सभी सामग्रियों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और इनकी विस्तृत जांच की जा रही है।

छापेमारी की इस प्रक्रिया के दौरान पुलिस ने केवल सामान की तलाशी ही नहीं ली, बल्कि सभी आरोपियों के परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए हैं और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस गबन की जानकारी थी। बताया जा रहा है कि शाम तक इस बात का पूरा एसेसमेंट यानी मूल्यांकन किया जाएगा कि कुल कितनी और क्या-क्या चीजें रिकवर हुई हैं। इसके बाद, रात में पुलिस यह तय करेगी कि क्या सोमवार को आरोपियों की पुलिस रिमांड लेने के लिए अदालत में अर्जी दी जाए या नहीं।

मिल्कीपुर और अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई

पुलिस की टीमों ने मिल्कीपुर ग्रामीण क्षेत्र में भी अपनी कार्रवाई का विस्तार किया। यहां आरोपी अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के पैतृक घरों पर पुलिस ने छापेमारी की। इसके साथ ही, जांचकर्ता रामाशंकर मिश्रा के आवास पर भी पहुंचे और उनके परिवार के सदस्यों से लंबी पूछताछ की गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने रामाशंकर मिश्रा के घर से कुछ बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच वर्तमान में जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इनसे गबन के तौर-तरीकों का खुलासा हो सकेगा।

मामले की पृष्ठभूमि और एसआईटी की जांच

राम मंदिर के चंदे में कथित गबन का यह पूरा विवाद 7 जून को तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण पवन पांडे ने एक गंभीर दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे से 5 करोड़ रुपये से लेकर 7 करोड़ 50 लाख रुपये तक की भारी राशि का गबन किया गया है। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने जांच की मांग की।

ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 जून को एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने अपनी जांच में कोई देरी नहीं की और 15 जून से 20 जून तक अयोध्या में प्रारंभिक जांच पड़ताल की। इस शुरुआती जांच के दौरान एसआईटी को कथित तौर पर श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई नकदी और कीमती वस्तुओं के प्रबंधन में प्रथम दृष्टया कई अनियमितताएं मिलीं। इन्हीं अनियमितताओं के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

8 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर

एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, रामाशंकर मिश्रा, मनीष यादव और करुणेश पांडे शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा आपस में रिश्तेदार हैं और उनका संबंध अनिल मिश्रा से भी बताया जा रहा है।

राम मंदिर ट्रस्ट का आधिकारिक बयान

इस पूरे प्रकरण पर राम मंदिर ट्रस्ट ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है। ट्रस्ट ने कहा है कि वह इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया, "पिछले कुछ दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं, उनसे हम स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी हैं। " ट्रस्ट का यह बयान श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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