जयपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 'शुद्ध आहार-मिलावट पर वार' अभियान के तहत एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है और इस अभियान के अंतर्गत विभाग की विशेष टीम ने राजधानी जयपुर के दो प्रमुख स्थानों पर स्थित प्रसिद्ध रावत मिष्ठान भंडार के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण अजमेर रोड और नारायण सिंह सर्किल स्थित दोनों प्रतिष्ठानों पर किया गया, जहां जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई और नियमों की भारी अनदेखी पाई गई। इस पूरी कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम ने गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों की गंभीर अवहेलना को देखते हुए कुल तीन खाद्य पदार्थों के संदेह के आधार पर नमूने लिए और उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा है। इसके साथ ही, मौके पर मिली करीब 36 प्रकार की अवधिपार यानी एक्सपायर्ड एवं अखाद्य सामग्री को पूरी तरह से नष्ट करवाया गया ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।
अजमेर रोड स्थित प्रतिष्ठान पर मिली गंभीर अनियमितताएं
अजमेर रोड पर स्थित रावत मिष्ठान भंडार के प्रतिष्ठान की जब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बारीकी से जांच की, तो वहां कई प्रकार की गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। सबसे बड़ी खामी यह पाई गई कि वहां पर बेची जा रही पैक्ड मिठाइयों के ऊपर पैकिंग की तारीख और एक्सपायरी तारीख जैसी बेहद जरूरी और अनिवार्य जानकारियां अंकित ही नहीं थीं। इस तरह की लापरवाही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। जब टीम ने प्रतिष्ठान के बेकरी काउंटर की जांच की, तो काउंटर के ठीक नीचे मृत कॉकरोच और मक्खियां पड़ी हुई मिलीं, जो वहां की अत्यंत खराब साफ-सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही थीं। इसके अलावा, प्रतिष्ठान के निर्माण क्षेत्र में भारी गंदगी पाई गई और वहां खाद्य अवशेष भी बिखरे हुए मिले, जो कीटों और बैक्टीरिया को आकर्षित कर सकते हैं।
निरीक्षण के दौरान यह भी देखने को मिला कि ग्राहकों को परोसी जाने वाली राज कचौरी और दही पूरी जैसी लोकप्रिय खाद्य सामग्रियां खुलेआम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अखबार पर परोसी जा रही थीं, जो कि खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए कोल्ड स्टोरेज की जब जांच की गई, तो स्थिति और भी चौंकाने वाली मिली। कोल्ड स्टोरेज में रखी कुछ चॉकलेट के अंदर जीवित और मृत दोनों प्रकार के कीट पाए गए। इन सभी गंभीर कमियों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर ही आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए तथा संबंधित प्रतिष्ठान के संचालकों को कड़ी चेतावनी दी।
नारायण सिंह सर्किल पर बिना लाइसेंस चल रहा था रेस्टोरेंट
दूसरी ओर, नारायण सिंह सर्किल स्थित रावत मिष्ठान भंडार के प्रतिष्ठान पर जब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम पहुंची, तो वहां एक और बड़ा अवैध मामला उजागर हुआ। जांच के दौरान पाया गया कि वहां संचालित होने वाला रेस्टोरेंट बिना किसी वैध खाद्य लाइसेंस के चलाया जा रहा था। बिना लाइसेंस के इतने बड़े स्तर पर खाद्य कारोबार का संचालन करना कानूनन अपराध है। जब टीम ने रेस्टोरेंट के भीतर और उसके निर्माण गोदाम की तलाशी ली, तो वहां बड़ी मात्रा में पिज्जा टॉपिंग, ब्रेड, पाव, फ्रूट कॉकटेल, बेबी कॉर्न, सॉस, क्रीम और अन्य कई प्रकार की अवधिपार यानी एक्सपायर्ड सामग्रियां पाई गईं। इन सभी एक्सपायर्ड और अखाद्य सामग्रियों का उपयोग धड़ल्ले से ग्राहकों के लिए खाद्य पदार्थ बनाने में किया जा रहा था, जो लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ था।
इसके अलावा, इस स्थान पर बिना किसी वैध लाइसेंस के खाद्य पदार्थों की री-पैकिंग का काम और समोसा तथा कचौरी के निर्माण की गतिविधियां भी बड़े पैमाने पर संचालित की जा रही थीं। इन सभी गंभीर और खतरनाक अनियमितताओं को तुरंत संज्ञान में लेते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नारायण सिंह सर्किल स्थित इस रेस्टोरेंट को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया। टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जब तक प्रतिष्ठान को सक्षम प्राधिकारी से वैध खाद्य लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक इस रेस्टोरेंट का संचालन किसी भी स्थिति में नहीं किया जाएगा।
विभाग की आगे की कार्रवाई और निर्देश
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने मीडिया और सार्वजनिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण के दौरान जितनी भी अनियमितताएं और कमियां पाई गई हैं, उनके संबंध में नियमानुसार सुधार सूचना जारी की जा रही है। विभाग ने शहर के तमाम अन्य खाद्य कारोबारियों और मिष्ठान निर्माताओं को भी यह कड़ा संदेश दिया है कि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करें तथा स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के तयशुदा मानकों का पूर्ण रूप से पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि मिलावटखोरों और खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा और 'शुद्ध आहार-मिलावट पर वार' अभियान के तहत इस तरह की कड़ी कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी, ताकि जयपुर के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके।