भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया है कि आने वाले समय में कर्ज की मासिक किस्तों यानी ईएमआई में बढ़ोतरी हो सकती है। अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के मिनट्स से यह स्पष्ट हुआ है कि यदि खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई को और अधिक बढ़ावा देती हैं, तो देश के नीति निर्माता तीसरी तिमाही में ब्याज दरों में वृद्धि करने पर विचार कर सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और घरेलू मोर्चे पर अनियमित मानसून तथा पश्चिम एशिया के संघर्षों ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि जून तक कीमतों में अत्यधिक तेजी के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले थे, लेकिन भविष्य के जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
महंगाई का बढ़ता जोखिम और आरबीआई का रुख
3 से 5 अगस्त के बीच आयोजित की गई इस महत्वपूर्ण बैठक में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें अत्यंत सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि खाने-पीने की चीजों, ईंधन और अन्य इनपुट लागतों में होने वाली वृद्धि महंगाई को अनियंत्रित कर सकती है। वर्तमान में पॉलिसी रेट को 5 दशमलव 25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है, लेकिन गवर्नर ने चेतावनी दी है कि यदि महंगाई के जोखिम सच साबित होते हैं, तो मौद्रिक नीति को सख्त करना अनिवार्य हो जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में इजाफा किया जा सकता है, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा। गवर्नर ने यह भी कहा कि सप्लाई-साइड शॉक के मामले में कदम उठाना तब जरूरी हो जाता है जब महंगाई व्यापक होने लगे।
डिप्टी गवर्नर की चिंताएं और भविष्य के अनुमान
आरबीआई की इस रिपोर्ट में डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने भी भविष्य की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंताएं जाहिर की हैं और उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में महंगाई के 5 दशमलव 9 प्रतिशत के ऊंचे स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इस स्थिति को देखते हुए साल के दौरान ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के आधार पर वित्त वर्ष 2027 के लिए हेडलाइन महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत लगाया गया है। तिमाही आधार पर देखें तो दूसरी तिमाही के लिए यह अनुमान 4 दशमलव 7 प्रतिशत और चौथी तिमाही के लिए 5 दशमलव 5 प्रतिशत है। वहीं कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है, उसके वित्त वर्ष 2027 के लिए 4 दशमलव 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
महंगाई के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 16 महीनों तक महंगाई 4 प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में थी, लेकिन जून में यह बढ़कर 4 दशमलव 4 प्रतिशत और जुलाई में 4 दशमलव 5 प्रतिशत हो गई। उन्होंने पिछले साल की तुलना करते हुए कहा कि जब पॉलिसी रेट को घटाकर 5 दशमलव 25 प्रतिशत किया गया था, तब औसत महंगाई दर केवल 2 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, इस साल हेडलाइन महंगाई दर का औसत पहले ही 3 दशमलव 93 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। कोर महंगाई दर के भी 2026-27 में औसतन 4 दशमलव 3 प्रतिशत रहने के आसार हैं, जो स्पष्ट रूप से पॉलिसी रेट में बदलाव की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं।
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण और वैश्विक प्रभाव
मौद्रिक नीति समिति ने फिलहाल न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला किया है ताकि भविष्य में जरूरत के अनुसार दरों को घटाया या बढ़ाया जा सके। एमपीसी के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि ईंधन की ऊंची कीमतें 'सेकंड-राउंड' महंगाई को जन्म दे सकती हैं, क्योंकि इनपुट लागत बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसके अलावा, परिवारों में महंगाई को लेकर बनी उच्च उम्मीदें भी दबाव बढ़ा रही हैं। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया का संघर्ष, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी जैसी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं। एमपीसी सदस्य नागेश कुमार ने भी बैठक में इन वैश्विक जोखिमों का जिक्र किया, जो घरेलू आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।