स्टारलिंक को चुनौती मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो अंतरिक्ष में भेजेगी 1650 सैटेलाइट

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स्टारलिंक को चुनौती मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो अंतरिक्ष में भेजेगी 1650 सैटेलाइट
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अंतरिक्ष के क्षेत्र में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के दबदबे को सीधी चुनौती देने के लिए मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस जियो ने एक बड़ी योजना तैयार की है। रिलायंस जियो जल्द ही अंतरिक्ष में 1600 से 1650 सैटेलाइट्स भेजने की तैयारी कर रही है। इस कदम के साथ ही मुकेश अंबानी अब एलन मस्क के वर्चस्व वाले क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, रिलायंस जियो अगले 2 से 3 सालों के भीतर ब्रॉडबैंड और डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से लगभग 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर इन सैटेलाइट्स का एक लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) कॉन्स्टेलेशन स्थापित करने की योजना बना रही है। यह पहल भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को अंतरिक्ष तक ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

तकनीकी ढांचा और नियामक प्रक्रिया

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस जियो ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारतीय अंतरिक्ष नियामक, इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के पास एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। वर्तमान में, इस प्रस्ताव के तकनीकी आर्किटेक्चर और कॉन्फ़िगरेशन की गहन जांच की जा रही है। यह पहली बार है जब कोई भारतीय निजी कंपनी इतने बड़े पैमाने पर मुनाफे वाले LEO सेक्टर में उतरने का प्रयास कर रही है और इस सेक्टर में वर्तमान में स्टारलिंक का दबदबा है, जिसके पास अंतरिक्ष में लगभग 10000 सैटेलाइट मौजूद हैं। जियो की योजना इन सैटेलाइट्स को 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित करने की है, जिससे डेटा ट्रांसमिशन में देरी कम होगी और हाई-स्पीड इंटरनेट सुनिश्चित किया जा सकेगा।

आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर

रिलायंस जियो का यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, देश विदेशी सैटेलाइट कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार ऑर्बिटल स्लॉट हासिल करने के लिए इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) के पास फाइलिंग में जियो की मदद करने पर विचार कर रही है। चूंकि एक भारतीय कंपनी इस रणनीतिक क्षेत्र में कदम रख रही है, इसलिए सरकार उसे पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार उन अन्य भारतीय कंपनियों की भी मदद करेगी जो इस क्षेत्र में प्रवेश करना चाहती हैं। यह कदम आत्मनिर्भर भारत के विजन को अंतरिक्ष क्षेत्र में मजबूती प्रदान करेगा।

प्रतिस्पर्धा और वैश्विक परिदृश्य

लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में, जेफ बेजोस की कंपनी अमेजन भी LEO में लगभग 3200 सैटेलाइट लगाने की प्रक्रिया में है, जिनमें से 300 से अधिक सैटेलाइट पहले ही ऑर्बिट में भेजे जा चुके हैं। वहीं, यूटेलसैट वनवेब (Eutelsat OneWeb) के पास अंतरिक्ष में लगभग 654 सैटेलाइट हैं। यूटेलसैट वनवेब में सुनील मित्तल की अगुवाई वाला भारती ग्रुप, फ्रांस सरकार के बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सेदार है। रिलायंस जियो का लक्जमबर्ग की कंपनी SES के साथ पहले से ही एक जॉइंट वेंचर है। हालांकि SES के पास जियोस्टेशनरी और मीडियम अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट मौजूद हैं, लेकिन LEO क्षेत्र में उसकी उपस्थिति नहीं है। ऐसे में जियो की यह नई योजना उसे अंतरिक्ष संचार के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है और वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीक का लोहा मनवा सकती है।

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