भारतीय दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए रूस से कच्चे तेल के आयात को फिर से शुरू करने की योजना बनाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों को दी गई धमकियों के बावजूद, रिलायंस ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी है। कंपनी फरवरी महीने से अपनी घरेलू रिफाइनरी के लिए रोजाना 1. 5 लाख बैरल तक रूसी तेल खरीदने की तैयारी कर रही है। यह कदम न केवल रिलायंस के लिए बल्कि भारत की ऊर्जा। सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्रंप की धमकियों का असर नहीं
हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय कंपनियां अपने व्यावसायिक हितों और देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र निर्णय ले रही हैं। रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करती है और उसे अपनी परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में कच्चे तेल की आवश्यकता होती है।
प्रतिबंध मुक्त विक्रेताओं से होगी खरीद
रिलायंस की रणनीति बहुत स्पष्ट है। कंपनी उन रूसी विक्रेताओं और बिचौलियों से तेल खरीदेगी जिन पर वर्तमान में कोई अमेरिकी प्रतिबंध नहीं है और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ने दिसंबर में आखिरी बार रूसी तेल प्राप्त किया था, जब उसे एक विशेष छूट मिली थी। अब कंपनी ने अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए नए रास्ते खोज लिए हैं और कंपनी का ध्यान उन ट्रेडिंग संस्थाओं पर है जो प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहकर तेल की आपूर्ति कर सकती हैं।
जामनगर रिफाइनरी की विशाल क्षमता
गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस का रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र है। इससे पहले रिलायंस रूसी कंपनी रोसनेफ्ट के साथ एक दीर्घकालिक समझौते के तहत रोजाना 5 लाख बैरल तेल का आयात कर रही थी। हालांकि, प्रतिबंधों के कारण इसमें कुछ समय के लिए रुकावट आई थी। अब 1 और 5 लाख बैरल प्रतिदिन की नई खेप से रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता को और मजबूती मिलेगी। रिलायंस केवल रूस पर निर्भर नहीं है; वह सऊदी अरब, इराक और कनाडा जैसे देशों से भी तेल की खरीद जारी रखे हुए है।
वेनेजुएला और वैश्विक ऊर्जा समीकरण
रिलायंस केवल रूस तक ही सीमित नहीं रहना चाहती और कंपनी ने अमेरिका से वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति भी मांगी है। यह दर्शाता है कि रिलायंस अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों को जितना संभव हो सके उतना विविध बनाना चाहती है ताकि किसी एक देश या राजनीतिक स्थिति पर उसकी निर्भरता कम हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से सस्ता तेल मिलना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इससे रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार होता है और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है।
भारत का कूटनीतिक रुख
भारत सरकार ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। रिलायंस जैसी निजी क्षेत्र की कंपनियों का यह कदम सरकार की इसी नीति का समर्थन करता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, रूस भारत के लिए एक विश्वसनीय और सस्ता विकल्प बनकर उभरा है। ट्रंप प्रशासन की भविष्य की नीतियों पर नजर रखते हुए भी रिलायंस ने यह साहसिक कदम उठाया है, जो भारतीय कॉर्पोरेट जगत के आत्मविश्वास को दर्शाता है।