Indian Markets 2026: 2026 के पहले दिन रुपया पस्त, शेयर बाजार मस्त, सोने-चांदी की चाल में गिरावट

Indian Markets 2026 - 2026 के पहले दिन रुपया पस्त, शेयर बाजार मस्त, सोने-चांदी की चाल में गिरावट
| Updated on: 01-Jan-2026 12:35 PM IST
साल 2026 का पहला दिन भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए एक मिश्रित शुरुआत लेकर आया है। जहां एक ओर शेयर बाजार ने सकारात्मक नोट पर कारोबार शुरू किया, वहीं भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता हुआ दिखाई दिया और इसके साथ ही, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसने उन निवेशकों के लिए एक संभावित अवसर पैदा किया है जो इन कीमती धातुओं में निवेश करने की सोच रहे हैं। यह शुरुआती रुझान पिछले साल, यानी 2025 के प्रदर्शन से काफी अलग है, जब रुपए। ने निवेशकों को निराश किया था, जबकि सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया था।

शेयर बाजार की सकारात्मक शुरुआत

साल 2026 के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने एक मजबूत और सकारात्मक शुरुआत की है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 223. 54 अंक की बढ़त के साथ 85,444. 14 अंक पर कारोबार करता हुआ देखा गया। यह वृद्धि बाजार में निवेशकों के भरोसे और सकारात्मक धारणा को दर्शाती है। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी 65 और 75 अंक की तेजी के साथ 26,195. 35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। यह दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक साथ आई तेजी बाजार की व्यापक मजबूती का संकेत देती है। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में से कई शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया, जिससे बाजार की तेजी को बल मिला और इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटर्नल, रिलायंस इंडस्ट्री्स, लार्सन एंड टुब्रो और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे ज्यादा लाभ में रहे।

इन कंपनियों के शेयरों में आई उछाल ने निवेशकों को उत्साहित किया। हालांकि, कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट भी दर्ज की गई, जिनमें आईटीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस शामिल थे, लेकिन इनकी गिरावट बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर पाई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजार गुरुवार को बंद रहे, जबकि अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका भारतीय बाजार पर सीधा असर नहीं दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई, जहां खाड़ी देशों का ब्रेंट क्रूड ऑयल 0 और 78 फीसदी गिरकर 60. 85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

विदेशी और घरेलू निवेशकों की भूमिका

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई). बुधवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 3,597. 38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी से पूंजी निकालने का संकेत देता है। हालांकि, इस बिकवाली के बावजूद बाजार में तेजी बनी रही, जिसका मुख्य कारण घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की मजबूत खरीदारी थी। डीआईआई ने 6,759. 64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे एफआईआई की बिकवाली के प्रभाव को बेअसर कर दिया गया और बाजार को ऊपर उठाने में मदद मिली। यह दर्शाता है कि घरेलू निवेशक भारतीय बाजार में विश्वास बनाए हुए हैं और इसे समर्थन दे रहे हैं।

रुपए की गिरावट का सिलसिला जारी

जहां एक ओर शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, वहीं भारतीय रुपए के लिए साल 2026 का पहला दिन निराशाजनक रहा। रुपए की गिरावट का सिलसिला 2025 के अंत से ही जारी है। और नए साल के पहले दिन भी इसमें कमी देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे टूटकर 89. 99 प्रति डॉलर पर आ गया। यह गिरावट विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी के कारण हुई, जिसने रुपए पर दबाव बनाए रखा। फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स ने बताया कि रुपया 2026 में चुनौतियों और सुरक्षा दोनों के साथ प्रवेश कर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, जो रुपए के लिए एक चुनौती है, हालांकि भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक कारक और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार इसे स्थिरता प्रदान करते रहेंगे।

इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89 और 94 पर खुला, लेकिन जल्द ही थोड़ा कमजोर होकर 89. 99 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से 11 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया बुधवार को 2025 के अंतिम कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89 और 88 पर बंद हुआ था। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0. 09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98. 32 पर रहा, जिससे डॉलर की मजबूती और रुपए पर दबाव और बढ़ गया। 2025 में रुपए ने निवेशकों को काफी निराश किया था, जब इसमें करीब 5 फीसदी की। गिरावट देखने को मिली थी, और 2026 की शुरुआत भी इसी प्रवृत्ति को दर्शा रही है।

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट

साल 2026 के पहले दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जो उन निवेशकों के। लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है जो इन कीमती धातुओं में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं। देश के वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सोना और चांदी दोनों ही सुस्त दिखाई दिए और सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर एमसीएक्स पर सोना 222 रुपए की गिरावट के साथ 1,35,225 रुपए प्रति दस ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान सोना 1,35,208 रुपए के साथ दिन के सबसे निचले स्तर पर भी पहुंच गया था। एक दिन पहले सोने की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी और यह 1,35,447 रुपए पर बंद हुआ था।

इसी तरह, वायदा बाजार में चांदी की कीमत में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। आंकड़ों के अनुसार, सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर चांदी 780 रुपए की गिरावट के साथ 2,34,921 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। कारोबारी सत्र के दौरान चांदी करीब 850 रुपए की गिरावट के साथ 2,34,855 के स्तर पर आ गई थी, जो दिन का सबसे निचला स्तर था। पिछले साल के आखिरी कारोबारी दिन चांदी बड़ी गिरावट के साथ 2,35,701 रुपए पर बंद हुई थी। यह गिरावट उन निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है जो 2025 में सोने। और चांदी द्वारा दिए गए शानदार रिटर्न को देखते हुए इन धातुओं में निवेश करना चाहते हैं। 2025 में सोने और चांदी ने निवेशकों को मालामाल कर दिया था, और बीते 50 बरस में ऐसी तेजी देखने को नहीं मिली थी।

2025 का वित्तीय परिदृश्य: एक संक्षिप्त अवलोकन

हालांकि, 2025 के असली सितारे सोना और चांदी थे और इन कीमती धातुओं ने निवेशकों को मालामाल कर दिया था, और इनकी कीमतों में बीते 50 बरस में ऐसी तेजी देखने को नहीं मिली थी। सोने और चांदी ने मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बचाव के रूप में काम किया और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे निवेशकों को आकर्षित किया। 2026 की शुरुआत इन तीनों प्रमुख परिसंपत्ति वर्गों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है, जिसमें प्रत्येक ने अपने तरीके से वर्ष का पहला दिन शुरू किया है। शेयर बाजार की तेजी, रुपए की कमजोरी और सोने-चांदी की गिरावट यह संकेत देती है कि 2026 में निवेशकों को विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में अलग-अलग तरह के रुझानों का सामना करना पड़ सकता है।

2025 का साल भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए एक मिश्रित अनुभव लेकर आया था और जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, भारतीय रुपए ने निवेशकों को काफी निराश किया था, जिसमें लगभग 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह गिरावट वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विदेशी पूंजी के बहिर्वाह जैसे कारकों के कारण हुई थी और इसके विपरीत, शेयर बाजार ने निवेशकों को कुछ हद तक सकारात्मक रिटर्न दिया था। निफ्टी में लगभग 10 फीसदी की तेजी देखने को मिली, जबकि सेंसेक्स ने करीब 9 फीसदी का रिटर्न दिया। यह दर्शाता है कि भारतीय इक्विटी बाजार ने चुनौतियों के बावजूद लचीलापन दिखाया।

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