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संदीप पाटिल का खुलासा: युवराज सिंह को बाहर करने में धोनी की भूमिका नहीं

संदीप पाटिल का खुलासा: युवराज सिंह को बाहर करने में धोनी की भूमिका नहीं
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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने एक बड़ा खुलासा करते हुए उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें एमएस धोनी को युवराज सिंह के करियर के अंत का जिम्मेदार माना जाता रहा है। एक हालिया यूट्यूब शो के दौरान पाटिल ने स्पष्ट किया कि धोनी ने कभी भी चयन समिति की बैठकों में युवराज सिंह को टीम से बाहर करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि धोनी ने हमेशा चयनकर्ताओं के फैसलों का सम्मान किया और कभी भी टीम चयन की प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप नहीं किया।

धोनी का चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप न होना

संदीप पाटिल ने आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर कहा कि एमएस धोनी ने एक बार भी चयन समिति की बैठक में या किसी विदेशी दौरे के दौरान युवराज सिंह को टीम से बाहर करने का सुझाव नहीं दिया। पाटिल के अनुसार धोनी ने हमेशा चयन समिति पर पूरा भरोसा जताया और टीम संयोजन के फैसलों को विशेषज्ञों पर छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि धोनी का ध्यान केवल मैदान पर टीम के प्रदर्शन पर रहता था और उन्होंने कभी भी किसी विशेष खिलाड़ी को बाहर करने के लिए दबाव नहीं बनाया।

चयन समिति की स्वायत्तता और निर्णय

पूर्व मुख्य चयनकर्ता ने स्पष्ट किया कि टीम में किसे रखना है और किसे बाहर करना है यह पूरी तरह से चयन समिति का सामूहिक निर्णय होता था। पाटिल ने कहा कि चयनकर्ता खिलाड़ियों के फॉर्म फिटनेस और टीम की भविष्य की जरूरतों के आधार पर निर्णय लेते थे। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि युवराज सिंह को बाहर किए जाने के फैसले में धोनी की कोई भूमिका नहीं थी और यह निर्णय पूरी तरह से चयनकर्ताओं द्वारा लिया गया था।

योगराज सिंह के आरोपों का संदर्भ

यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर एमएस धोनी को अपने बेटे के करियर के पतन के लिए दोषी ठहराया है। योगराज सिंह का दावा रहा है कि युवराज के पास अभी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 4 से 5 साल का समय शेष था लेकिन धोनी के कारण उन्हें मौका नहीं दिया गया। पाटिल के इस नए बयान ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से चुनौती दी है और धोनी के पक्ष को मजबूती प्रदान की है।

युवराज सिंह का भारतीय क्रिकेट में योगदान

युवराज सिंह को विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े मैच विजेताओं में गिना जाता है। उन्होंने 2007 के टी20 विश्व कप और 2011 के वनडे विश्व कप में भारत की जीत में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। 2011 के विश्व कप में वह 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे थे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने टीम में वापसी की थी लेकिन बाद के वर्षों में उनके फॉर्म में गिरावट देखी गई थी। संदीप पाटिल के अनुसार चयन संबंधी निर्णय केवल खेल के तकनीकी पहलुओं पर आधारित थे।

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