मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का रुख रहा। निवेशकों की धारणा पर अमेरिका और ईरान के बीच फिर से पैदा हुए तनाव का गहरा असर पड़ा, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान के साथ बंद हुए और बाजार में इस गिरावट का मुख्य कारण ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधा और क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंताएं रहीं, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया और वे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते नजर आए।
बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख सूचकांक
तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 372 पॉइंट 10 अंक यानी 0 पॉइंट 48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,728 पॉइंट 37 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया और एक समय सेंसेक्स 478 पॉइंट 72 अंक तक लुढ़क कर 76,621 पॉइंट 75 अंक के निचले स्तर पर आ गया था। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 109 पॉइंट 75 अंक यानी 0 पॉइंट 46 प्रतिशत टूटकर 23,946 पॉइंट 25 अंक पर बंद हुआ। बाजार में इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भी कमी आई है।
कोटक महिंद्रा बैंक और अन्य शेयरों की स्थिति
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में सबसे अधिक 3 पॉइंट 24 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बैंक ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि उसके प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अशोक वासवानी अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ देंगे। वासवानी ने स्पष्ट किया है कि वह 31 दिसंबर 2026 को अपना मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते हैं। इस नेतृत्व परिवर्तन की खबर के बाद बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया।
कोटक बैंक के अलावा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में भी प्रमुख रूप से गिरावट दर्ज की गई। इन कंपनियों के शेयरों पर बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता का असर साफ दिखा और दूसरी ओर, बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा। लाभ में रहने वाले प्रमुख शेयरों में इटर्नल, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एनटीपीसी शामिल रहे, जिन्होंने सूचकांक को और अधिक नीचे जाने से रोकने में कुछ हद तक मदद की।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 1 पॉइंट 51 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73 डॉलर 9 सेंट प्रति बैरल पर पहुंच गया। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बाजार की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सप्ताहांत में वैश्विक स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया था। उन्होंने बताया कि तनाव कम करने और बातचीत फिर से शुरू करने पर सहमत होने से पहले अमेरिका और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक-दूसरे पर हमले किए थे। हालांकि इन हमलों से होने वाला नुकसान सीमित रहा, लेकिन समझौते की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
विदेशी बाजारों का प्रभाव और एफआईआई डेटा
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त बनाने में सफल रहे और यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार के दौरान गिरावट का रुख देखा गया, जो वैश्विक निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए थे। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को 383 करोड़ 76 लाख रुपये के शेयर खरीदे थे। पिछले कारोबारी सत्र यानी गुरुवार को सेंसेक्स 109 पॉइंट 25 अंक की बढ़त के साथ 77,100 पॉइंट 47 अंक पर और निफ्टी 34 पॉइंट 35 अंक की तेजी के साथ 24,056 अंक पर बंद हुआ था।