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सेंसेक्स 1040 अंक उछला, निफ्टी 22,800 के पार, वैश्विक संकेतों का असर

सेंसेक्स 1040 अंक उछला, निफ्टी 22,800 के पार, वैश्विक संकेतों का असर
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत धमाकेदार रही। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के बीच घरेलू सूचकांकों ने बड़ी बढ़त दर्ज की। 84 के स्तर पर पहुंच गया। 25 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के कारण देखा जा रहा है।

वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और बाजार की प्रतिक्रिया

बाजार में आई इस तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को लेकर दिया गया बयान प्रमुख कारण माना जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अमेरिकी नेतृत्व ने ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोकने का संकेत दिया है और ईरानी नेतृत्व के साथ सकारात्मक बातचीत की संभावना जताई है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय ने शुरुआत में इन दावों का खंडन किया था, लेकिन बाद में यह स्वीकार किया गया कि कुछ देशों की मध्यस्थता के माध्यम से कूटनीतिक बातचीत शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन घटनाक्रमों ने वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता को कम किया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी सकारात्मक रूप से पड़ा है।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट का प्रभाव

भू-राजनीतिक तनाव कम होने की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 10% गिरकर $100 प्रति बैरल के आसपास आ गई है। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के अमेरिकी ऑयल फ्यूचर्स भी $80 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट मार्जिन के लिए सकारात्मक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में यह नरमी मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में सहायक हो सकती है, जिससे बाजार की धारणा को बल मिला है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और रुपये की स्थिति

बाजार में आई इस तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से बिकवाली का दबाव बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं। इस बिकवाली का एक मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में बनी कमजोरी है और विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रुपये का स्थिर होना अत्यंत आवश्यक है। जब तक मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, तब तक विदेशी निवेशकों की ओर से सतर्कता बरती जा सकती है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को निचले स्तरों पर सहारा दिया है।

आईटी और फार्मा सेक्टर में मजबूती के संकेत

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती देखी जा रही है। रुपये के मूल्य में गिरावट का इन क्षेत्रों को लाभ मिलता है क्योंकि इनकी आय का एक बड़ा हिस्सा निर्यात से आता है। मंगलवार के कारोबारी सत्र में इन क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का रुझान देखा गया। इसके अलावा, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी शुरुआती कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। बाजार के जानकारों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर युद्ध की संभावनाओं के कम होने से निवेशकों का जोखिम लेने का उत्साह बढ़ा है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लिवाली देखी जा रही है।

बाजार में उतार-चढ़ाव और कूटनीतिक मध्यस्थता

वर्तमान में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय समाचारों और कूटनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर है और ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशें यदि सफल रहती हैं, तो बाजार में स्थिरता आने की संभावना है। हालांकि, निकट भविष्य में युद्ध से जुड़ी खबरों के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के अनुसार, राजनीतिक माहौल इस समय काफी अनिश्चित है, जो बाजार की चाल को प्रभावित कर रहा है और आने वाले दिनों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा की कीमतों पर इन कूटनीतिक वार्ताओं का क्या असर होता है, इस पर बाजार की पैनी नजर बनी रहेगी।

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