सोने की मांग छह साल के निचले स्तर पर आने से क्या और सस्ते होंगे दाम, जानें मुख्य अपडेट

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सोने की मांग छह साल के निचले स्तर पर आने से क्या और सस्ते होंगे दाम, जानें मुख्य अपडेट
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भारत में त्योहारी सीजन के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग में आई भारी गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है। 3 नवंबर यानी आज सोने के भाव में 1500 रुपये से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है, जिसका प्रमुख कारण गोल्ड की डिमांड में कमी आना है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया है। भारत में सोने के दाम ज्यादा होने की वजह से डिमांड छह साल के निचले स्तर पर चली गई है, जिसकी वजह से कीमतों में गिरावट आई है और संभावना इस बात की भी है कि इसका असर आने वाले दिनों में और देखने को मिल सकता है, जिसका मतलब है कि सोने की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि आखिर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में गोल्ड डिमांड को लेकर किस तरह की जानकारी दी गई है और इसका आम जनजीवन पर क्या असर पड़ रहा है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट और छह साल का निचला स्तर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि 2026 में भारत में सोने की मांग गिरकर छह साल के निचले स्तर, यानी लगभग 650 टन पर आ सकती है। इसकी मुख्य वजह सोने की रिकॉर्ड-तोड़ और ऊंची कीमतें हैं, जिनके कारण आभूषणों की बिक्री पर बुरा असर पड़ रहा है और निवेश के लिए भी सोने की मांग कम हो गई है। चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का कंज्यूमर देश भारत, ईरान युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई से लगातार जूझ रहा है। इसके साथ ही, देश में कमजोर मानसून के चलते ग्रामीण इलाकों में आभूषणों की मांग में कमी आने की आशंका जताई गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारतीय ऑपरेशंस के मुख्य कार्यकारी सचिन जैन ने रॉयटर्स को दिए गए अपने बयान में बताया कि साल के पहले नौ महीनों में आभूषणों की मांग में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप कुल मांग घटकर लगभग 650 मीट्रिक टन रहने की संभावना जताई जा रही है, जो साल 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा। आपको याद दिला दें कि साल 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण देश भर में आभूषणों की दुकानें बंद करनी पड़ी थीं।

ज्वेलरी की सेल और निवेश की मांग में भारी गिरावट

5 मीट्रिक टन रह गई है। इस आंकड़े में आभूषणों की खरीद में 20 फीसदी की भारी गिरावट और निवेश की मांग में 40 फीसदी की सुस्ती दर्ज की गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि दिसंबर तिमाही में मांग में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, क्योंकि दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों और शादियों के सीजन के कारण लोग सोना खरीदना पसंद करते हैं। देश में अक्टूबर के महीने में दशहरा मनाया गया और नवंबर की शुरुआत में दिवाली मनाई जाएगी, जिस दौरान देश भर में सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। WGC की मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, सोने की ऊंची कीमतों और कमजोर मानसून के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में लंबे समय से सुस्ती बनी हुई है, जिससे सोने की मांग काफी हद तक सीमित रह सकती है.

ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था और आय पर असर

भारत में सोने की आधी से ज्यादा मांग सीधे तौर पर ग्रामीण इलाकों से आती है, जहां देश के लाखों लोगों के लिए आभूषण धन संचय करने का एक पारंपरिक और सुरक्षित जरिया माने जाते हैं। साल 2026 में मानसून के दौरान एक दशक से भी अधिक समय में सबसे कम बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण कृषि उत्पादन पर गहरा असर पड़ा और देश के किसानों की आय में कमी आई है। सचिन जैन ने यह भी बताया कि सितंबर तिमाही के दौरान भारत में सोने का कुल आयात कम हुआ है। इसका एक अन्य बड़ा कारण यह भी है कि सरकार द्वारा इस साल की शुरुआत में सोने पर आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद, अनौपचारिक तरीके से यानी बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के देश में सोने का आना बढ़ गया है। इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से सोने के बाजार में एक नया और अनिश्चित दौर देखने को मिल रहा है, जिससे खरीदार और निवेशक दोनों ही सतर्क रुख अपना रहे हैं।

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