सऊदी अरब में मिसाइल हमला और मक्का मदीना विवाद पर बड़ी जंग, पढ़ें पूरी रिपोर्ट और ताज़ा अपडेट

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सऊदी अरब में मिसाइल हमला और मक्का मदीना विवाद पर बड़ी जंग, पढ़ें पूरी रिपोर्ट और ताज़ा अपडेट
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यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच चल रहे संघर्ष ने एक बार फिर से बेहद खतरनाक और गंभीर रूप ले लिया है। शनिवार को इस क्षेत्र में तनाव उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब सऊदी अरब की ओर से यह आधिकारिक दावा किया गया कि उसकी रक्षा प्रणाली ने हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। सऊदी अधिकारियों की ओर से दी गई शुरुआती और महत्वपूर्ण जानकारी के अनुसार, इन मिसाइलों का मुख्य और प्रत्यक्ष निशाना इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहर मक्का और मदीना क्षेत्र थे। इस बड़े दावे के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों और मध्य पूर्व की राजनीति में भारी भूचाल आ गया है, क्योंकि किसी भी धार्मिक स्थल या उसके आसपास के इलाके को निशाना बनाना युद्ध के नियमों और मानवीय संवेदनाओं का खुला उल्लंघन माना जाता है।

हालांकि, सऊदी अरब के इन गंभीर और सनसनीखेज आरोपों का जवाब देते हुए हूती विद्रोहियों ने मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों पर किसी भी प्रकार के हमले की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब के इन दावों को पूरी तरह से एक बड़ा झूठ और मनगढ़ंत कहानी करार दिया है और उनका कहना है कि वे कभी भी इन धार्मिक स्थलों को अपना निशाना नहीं बना सकते। इसके उलट, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह दावा किया है कि उनके संगठन ने शनिवार को सऊदी अरब के महत्वपूर्ण रणनीतिक तेल ठिकानों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर बेहद सटीक और बड़े हमले किए हैं। हूतियों के इस बयान से यह साफ हो गया है कि दोनों पक्षों के बीच दावों और प्रतिदावों का एक नया दौर शुरू हो चुका है, जिससे जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बने हुए हैं।

सऊदी सिविल डिफेंस की कार्रवाई और मलबे का गिरना

सऊदी सिविल डिफेंस से मिली विस्तृत जानकारी के मुताबिक, हूती विद्रोहियों की ओर से दागी गई मिसाइलों को हवा में रोके जाने के बाद उनके खतरनाक अवशेष और मलबे देश के कई प्रमुख शहरों और इलाकों में आ गिरे। इनमें जेद्दा, ताइफ और राबिग जैसे घनी आबादी वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं। इसके अलावा, मक्का शहर के ठीक बाहर स्थित वादी मुगम्मास क्षेत्र में भी मिसाइल के जलते हुए टुकड़े और टुकड़े बरामद किए गए हैं। सऊदी अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि इन संवेदनशील मक्का और मदीना क्षेत्रों में आसमान से मलबा गिरने की अचानक हुई घटनाओं से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन और राहत टीमों को युद्ध स्तर पर तैनात किया गया था। इन टीमों ने तेजी से काम करते हुए मलबे को हटाया और यह सुनिश्चित किया कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की बड़ी जनहानि या नुकसान का सामना न करना पड़े, हालांकि डर का माहौल पूरे क्षेत्र में फैल गया था।

हूतियों का तेल ठिकानों और एयरपोर्ट पर हमले का दावा

दूसरी तरफ, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने अपनी सैन्य सफलताओं का बखान करते हुए दावा किया कि शनिवार को उनके लड़ाकों ने सऊदी अरब की रीढ़ कहे जाने वाले तेल प्रतिष्ठानों और बड़े हवाई अड्डों को खासतौर पर निशाना बनाया है। उनके द्वारा जारी किए गए विवरण के अनुसार, इन हमलों के मुख्य लक्ष्यों में यानबू शहर में स्थित सऊदी अरामको का अति-महत्वपूर्ण ठिकाना, राबिग तेल रिफाइनरी और देश की राजधानी रियाद में स्थित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल थे। हूतियों ने यह भी दावा किया कि उनके ड्रोन और मिसाइल अभियानों के दायरे में दमाम का किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नजरान का एक प्रमुख एयरपोर्ट और खमिस मुशैत का सामरिक एयरबेस भी मजबूती से शामिल थे। उनके सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, सऊदी अरब के कच्चे तेल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पंप करने वाले मुख्य स्टेशन और विशाल ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन भी उनके निशाने पर थे, जिससे सऊदी अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुंचाई जा सके और हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इन सभी विशिष्ट हमलों की तत्काल तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है और यह भी पूरी तरह से साफ नहीं हो पाया है कि वास्तव में ये मिसाइलें या ड्रोन अपने निर्धारित लक्ष्य तक सफलतापूर्वक पहुंचे थे या उन्हें रास्ते में ही सऊदी सुरक्षा प्रणालियों द्वारा रोककर नष्ट कर दिया गया था।

यमन के अदन शहर में भी क्रूर मिसाइल हमले

सऊदी अरब की मुख्य भूमि के अलावा, यमन के भीतर भी हिंसा की भीषण घटनाएं लगातार जारी हैं। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह जानकारी दी कि हूती विद्रोहियों ने देश के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में स्थित कोस्ट गार्ड्स के महत्वपूर्ण ठिकानों पर एक साथ तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन क्रूर हमलों में से दो मिसाइलें सीधे तौर पर कोस्ट गार्ड्स के मुख्य हेडक्वार्टर पर जा गिरीं, जबकि तीसरी मिसाइल तवाही इलाके की एक आवासीय या आधिकारिक इमारत पर जाकर लगी, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इसके साथ ही, हूती विद्रोहियों ने अदन के भीतर सऊदी समर्थित सैनिकों के बड़े पैमाने पर चल रहे जमावड़े और वहां स्थित नौसेना यानी नेवी बेस पर भी अपने हमलों को अंजाम देने का खुला दावा किया है और इन लगातार हमलों से यमन की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर बहुत बड़ा संकट मंडराने लगा है, और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सऊदी अरब में हाई अलर्ट और उड़ानों की अनिश्चितकालीन रद्दीकरण

इन ताबड़तोड़ हमलों और संभावित खतरों को देखते हुए सऊदी सिविल डिफेंस ने देश के मक्का प्रांत, जेद्दा, ताइफ और यानबू जैसे संवेदनशील शहरों में हवाई हमले के गंभीर खतरे को लेकर तुरंत एक चेतावनी जारी की। गनीमत यह रही कि इस चेतावनी के जारी होने के करीब दस मिनट बाद ही अधिकारियों की ओर से यह राहत भरी घोषणा कर दी गई कि फिलहाल आसमान से मंडरा रहा खतरा टल चुका है और स्थिति नियंत्रण में है। इसके बावजूद, देश के नागरिकों और वहां रह रहे प्रवासियों को सख्त हिदायत दी गई कि वे सरकार की ओर से जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें, किसी भी प्रकार की भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और सोशल मीडिया पर इन घटनाओं की कोई भी वीडियो या तस्वीर बनाकर साझा न करें। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए लोगों को सलाह दी गई कि वे किसी भी मदद के लिए सीधे आपातकालीन नंबर 911 पर फोन करें।

इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते हवाई सुरक्षा खतरों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाओं पर भी पड़ा है और देश की प्रमुख विमानन कंपनियों में शामिल एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी उड़ानों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रियाद और दमाम जाने वाली सभी उड़ानों को आगामी 7 नवंबर 2026 तक के लिए पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, जेद्दा के लिए संचालित होने वाली उड़ानों को भी 31 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। भारत की अन्य प्रमुख बजट एयरलाइंस जैसे कि इंडिगो और अकासा एयर ने भी मौजूदा सुरक्षा हालातों और विमानन जोखिमों को देखते हुए सऊदी अरब के विभिन्न शहरों के लिए अपनी नियमित उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए या आगामी आदेशों तक रद्द कर दी हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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