अमेरिका के जॉर्जिया राज्य का फॉर्सिथ काउंटी एक गंभीर नस्लवाद और हिंसक इतिहास से जुड़ा हुआ क्षेत्र माना जाता है। अमेरिका में 3 नवंबर को होने जा रहे मिड टर्म के चुनावों के बीच, इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बिल्कुल उलट एक बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। यहां से भारतीय मूल की एक महिला, शुचिता पटेल, डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर काउंटी कमिश्नर का स्थानीय चुनाव लड़ रही हैं। उनका यह कदम इस क्षेत्र की राजनीतिक और सामाजिक दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने का प्रयास माना जा रहा है।
शक्तिशाली रिपब्लिकन नेता से कड़ा मुकाबला
शुचिता पटेल का चुनावी मुकाबला एक ऐसे शक्तिशाली रिपब्लिकन नेता से हो रहा है, जो पिछले 16 सालों से लगातार बिना किसी विरोध के चुनाव जीतता आ रहा है और स्थानीय स्तर पर लोगों पर अपनी धौंस जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। शुचिता पटेल का मुख्य मकसद इस डर के माहौल को पूरी तरह से खत्म करना है। इसके साथ ही वे अपने प्रवासी यानी भारतीय समुदाय की पूरी रक्षा करना चाहती हैं और आने वाली पीढ़ी यानी बच्चों के भविष्य के लिए एक बेहतर, सुंदर और सुरक्षित समाज का निर्माण करना चाहती हैं।
शुचिता पटेल का अमेरिकी परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
नॉर्थ जॉर्जिया की रहने वाली शुचिता पटेल का जन्म अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में हुआ था और साल 1993 में वे नॉर्थ जॉर्जिया आईं और तब से लगातार यहीं पर बस गईं। उन्होंने अपनी यहीं पर शिक्षा हासिल की, अपना करियर पूरी मेहनत से खड़ा किया और उनके तीन बच्चे हैं। ” शुचिता के माता-पिता मूल रूप से भारत से ताल्लुक रखते हैं और वे भारत से अमेरिका आकर बसे थे।
फाइनेंस क्षेत्र की अनुभवी प्रोफेशनल
फाइनेंस क्षेत्र की एक अनुभवी प्रोफेशनल के रूप में शुचिता पटेल के पास एफपीएंडए यानी फाइनेंशियल प्लानिंग एंड एनालिसिस, कंट्रोलरशिप और कंप्लायंस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल 15 साल का लंबा अनुभव है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी कंसल्टिंग फर्मों से लेकर स्थानीय छोटे व्यवसायों तक कई तरह की विभिन्न कंपनियों में काम किया है। वे बजट किस तरह से काम करता है, इसे बहुत अच्छी तरह जानती हैं और समझती हैं और उनका साफ कहना है कि वे उन बातों और गड़बड़ियों को भी आसानी से पकड़ सकती हैं जिन्हें कोई दूसरा छिपाना चाहता हो। वे सही सार्वजनिक निवेश और दिखावे वाली निजी डील के बीच के अंतर को बहुत स्पष्ट रूप से समझती हैं।
शुचिता के जीवन का मूल मंत्र
अपने जीवन के मूल मंत्र के बारे में बात करते हुए शुचिता ने बताया, “मैं उन प्रवासियों की पहली पीढ़ी की बेटी हूं, जिन्होंने मुझे सिखाया कि अगर आप दूसरों को अपने साथ लेकर नहीं चलते, तो आपकी सफलता का कोई खास मतलब नहीं है। यह कोई टैगलाइन नहीं है और ” उनकी यह सोच उनके सार्वजनिक जीवन में भी साफ झलकती है।
फॉर्सिथ काउंटी का काला और नस्लीय इतिहास
आपको बता दें कि शुचिता पटेल जॉर्जिया के फोरसिथ काउंटी में चुनाव लड़ने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं। इस काउंटी का पुराना और राजनीतिक इतिहास काफी काला रहा है। इस क्षेत्र में अतीत में बड़े पैमाने पर नस्लीय हिंसा और भीड़ द्वारा हत्या यानी लिंचिंग जैसी भयानक घटनाएं हुई थीं। साल 1912 में यहां के स्थानीय गोरे लोगों और कट्टरपंथी समूहों जैसे कि केकेके यानी कु क्लक्स क्लान ने लगभग सभी काले लोगों को जबरदस्ती इस इलाके से भगा दिया था। इस घटना के बाद कई दशकों तक यह पूरा इलाका सिर्फ गोरों का क्षेत्र बनकर ही रह गया था, जहां अन्य जातियों के लोगों का टिक पाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में शुचिता पटेल की यह उम्मीदवारी इस इलाके के इतिहास और भविष्य दोनों के लिहाज से एक बेहद ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम है।