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सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा: क्या पति की विरासत और NCP को बचा पाएंगी?

सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा: क्या पति की विरासत और NCP को बचा पाएंगी?
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक विमान हादसे में हुई असामयिक मृत्यु ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और महाराष्ट्र की सत्ता संरचना को हिलाकर रख दिया है। इस दुखद घड़ी में अब सबकी निगाहें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार पर टिकी हैं। सुनेत्रा पवार अब उस विरासत को संभालने के लिए आगे बढ़ रही हैं जिसे 'दादा' ने दशकों की मेहनत से सींचा था।

महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री का सफर

अजित पवार के निधन के मात्र तीन दिन बाद ही एनसीपी विधायक। दल ने सुनेत्रा पवार को अपना नेता चुनने का फैसला किया है। यह कदम न केवल पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए उठाया गया है, बल्कि यह महाराष्ट्र के इतिहास में एक नया अध्याय भी लिखेगा। सुनेत्रा पवार राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। हालांकि, यह ताज कांटों भरा है। बारामती में उमड़ी प्रशंसकों की भारी भीड़ और उनकी आंखों में अपने नेता को खोने का गम साफ बयां कर रहा है कि सुनेत्रा के कंधों पर कितना बड़ा बोझ है।

दो दिग्गज राजनीतिक परिवारों का अनुभव

सुनेत्रा पवार भले ही सक्रिय राजनीति के फ्रंटफुट पर अभी आई हों, लेकिन उनका राजनीतिक अनुभव काफी गहरा है। वह खुद एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार की बेटी हैं और फिर उनका विवाह पवार जैसे कद्दावर परिवार में हुआ। उन्होंने सालों तक अजित पवार के साथ रहकर राजनीति की बारीकियों को समझा है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले तक वह मुख्य रूप से सामाजिक कार्यों और जनसेवा में व्यस्त रहती थीं, लेकिन अब हालात ने उन्हें सीधे सत्ता के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

पार्टी के अस्तित्व और विलय का बड़ा संकट

सुनेत्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती एनसीपी के अस्तित्व को बचाए रखना है। पार्टी के भीतर इस समय दो विचारधाराएं टकरा रही हैं। एक गुट चाहता है कि शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के साथ तुरंत। विलय कर लिया जाए ताकि पवार परिवार की ताकत फिर से एकजुट हो सके। वहीं, दूसरा गुट अपनी अलग पहचान बनाए रखने और शरद पवार के गुट में शामिल न होने की जिद पर अड़ा है और छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे अनुभवी नेताओं के साथ तालमेल बिठाना और उन्हें एक सूत्र में बांधे रखना सुनेत्रा के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा।

महायुति गठबंधन में साख बनाए रखने की चुनौती

अजित पवार का महायुति गठबंधन (बीजेपी और शिवसेना-शिंदे गुट) में एक विशेष कद था। वह न केवल एक कुशल प्रशासक थे बल्कि गठबंधन के भीतर अपनी बात मनवाने की क्षमता भी रखते थे। अब सुनेत्रा को उसी गठबंधन में अपनी जगह बनानी होगी जहां पहले से ही दो बड़े दल हावी हैं। क्या वह बीजेपी और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ उसी। मजबूती से सौदेबाजी कर पाएंगी जैसे अजित पवार करते थे? यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब आने वाला समय देगा।

बेटों की अनुभवहीनता और नेतृत्व का सवाल

अजित पवार के दोनों बेटे, पार्थ पवार और जय पवार, अभी राजनीति में उतने परिपक्व नहीं माने जाते हैं और यही कारण है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों ने केवल सुनेत्रा पवार के नाम पर ही सहमति जताई। कार्यकर्ताओं को लगता है कि केवल सुनेत्रा ही वह कड़ी हैं जो अजित पवार के समर्थकों को एकजुट रख सकती हैं और लेकिन नेतृत्व केवल सहानुभूति से नहीं चलता, इसके लिए कड़े फैसले लेने की क्षमता भी जरूरी है।

शरद पवार और बीजेपी का नया समीकरण

अजित पवार के जाने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में दो नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्या शरद पवार अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को किनारे रखकर बीजेपी के साथ आने का विचार करेंगे और और क्या बीजेपी शरद पवार पर उसी तरह भरोसा कर पाएगी जैसा उसने अजित पवार पर किया था? इन सवालों के बीच सुनेत्रा पवार को अपनी राह खुद बनानी होगी। उन्हें यह साबित करना होगा कि वह केवल अजित पवार की पत्नी नहीं, बल्कि एक सक्षम नेता भी हैं जो महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बना सकती हैं।

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