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सुनीता विलियम्स का संन्यास- अंतरिक्ष की 'परी' के वो 5 रिकॉर्ड जो कोई नहीं तोड़ पाया

सुनीता विलियम्स का संन्यास- अंतरिक्ष की 'परी' के वो 5 रिकॉर्ड जो कोई नहीं तोड़ पाया
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दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने आखिरकार नासा से संन्यास लेने की घोषणा कर दी है। सुनीता विलियम्स का नाम अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने करियर के दौरान न केवल जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया, बल्कि अंतरिक्ष की। गहराइयों में ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगे। उनके रिटायरमेंट की खबर ने विज्ञान जगत में एक युग के अंत जैसा अहसास कराया। है, लेकिन उनके द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड्स आज भी उनकी महानता की गवाही दे रहे हैं।

अंतरिक्ष में बिताए 608 यादगार दिन

सुनीता विलियम्स के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक अंतरिक्ष में उनका लंबा प्रवास है। उन्होंने अपने पूरे करियर के दौरान कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। यह समय उन्होंने तीन अलग-अलग मिशनों के दौरान हासिल किया और अंतरिक्ष में इतने लंबे समय तक रहना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सुनीता ने हर बार अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। उन्होंने अभियान 14/15, 32/33 और हालिया 71/72 मिशनों में अपनी सेवाएं दीं।

स्पेसवॉक की निर्विवाद महारानी

जब बात स्पेसवॉक यानी अंतरिक्ष में चहलकदमी की आती है, तो सुनीता विलियम्स का नाम सबसे ऊपर आता है। उनके नाम एक महिला अंतरिक्ष यात्री के तौर पर सबसे ज्यादा बार और सबसे लंबी अवधि तक स्पेसवॉक करने का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने कुल 9 बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर निकलकर खुले अंतरिक्ष में काम किया है। इन 9 स्पेसवॉक की कुल अवधि 62 घंटे और 6 मिनट से भी ज्यादा है। यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि वे तकनीकी रूप से कितनी कुशल और साहसी रही हैं।

गुजरात के झूलासन से नासा तक का सफर

सुनीता विलियम्स की सफलता की जड़ें भारत के गुजरात राज्य से जुड़ी हैं। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव के रहने वाले थे, जो बाद में अमेरिका जाकर बस गए। सुनीता का जन्म और पालन-पोषण भले ही अमेरिका में हुआ, लेकिन वे हमेशा अपनी भारतीय जड़ों से जुड़ी रहीं। वे कई बार भारत आईं और अपने पैतृक गांव का दौरा भी किया। उन्होंने हमेशा गर्व से कहा है कि उनकी सफलता में उनके भारतीय संस्कारों का बड़ा हाथ है।

सम्मानों से भरा शानदार करियर

सुनीता विलियम्स को उनकी असाधारण सेवाओं के लिए अनगिनत पुरस्कारों से नवाजा गया है। उन्हें डीएसएसएम (2), लीजन ऑफ मेरिट, नेवी कमेंडेशन मेडल (2), और नेवी एंड मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिले हैं। इसके अलावा उन्हें ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल से भी सम्मानित किया गया है। ये पुरस्कार न केवल उनकी वैज्ञानिक दक्षता को दर्शाते हैं, बल्कि एक सैनिक और मानवतावादी के रूप में उनके चरित्र को भी उजागर करते हैं।

चुनौतियों भरा आखिरी मिशन और वापसी

सुनीता विलियम्स का आखिरी मिशन काफी चर्चा में रहा। पिछले साल बोइंग स्टारलाइनर मिशन के दौरान तकनीकी खराबी के कारण उन्हें और उनके साथी को कई महीनों तक अंतरिक्ष में ही रुकना पड़ा था। इस दौरान पूरी दुनिया उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। हालांकि, सुनीता ने इस कठिन समय में भी धैर्य नहीं खोया और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक कार्यों में जुटी रहीं। जब वे सुरक्षित धरती पर लौटीं, तो भारत से लेकर अमेरिका तक जश्न मनाया गया। उनका यह जज्बा ही उन्हें दुनिया की सबसे महान अंतरिक्ष यात्रियों की श्रेणी में खड़ा करता है।

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