संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश होने वाले महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुले ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करने पर तभी विचार करेगी जब सरकार सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने की शर्त को आधिकारिक और लिखित रूप में पेश करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वे सही समय पर निर्णय लेंगे।
50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने की लिखित मांग
सुप्रिया सुले ने जोर देकर कहा कि परिसीमन पर सरकार को 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव आधिकारिक रूप से देना चाहिए। " सुले के अनुसार, यदि INDIA गठबंधन इस प्रस्ताव पर सहमत होता है, तो उनकी पार्टी चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि वर्तमान में उनके सामने ऐसा कोई लिखित प्रस्ताव नहीं है, जिसके आधार पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सके।
अमित शाह का लोकसभा में बयान और आंकड़े
इस पूरे विवाद की जड़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में दिया गया वह बयान है जिसमें उन्होंने सीटों की संख्या बढ़ाने की बात कही थी। शाह ने कहा था कि परिसीमन विधेयक 2026 से दक्षिण के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि फायदा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि सरकार ने Delimitation Commission Act के अंदर कोई बदलाव नहीं किया है और पुराने एक्ट को पूर्ण विराम और अल्पविराम के साथ दोहराया गया है। शाह के अनुसार, 50 फीसदी वृद्धि मॉडल लागू होने के बाद लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी। इससे दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों में भी भारी बढ़ोतरी होगी। वर्तमान में दक्षिण भारत के 129 सांसद हैं, जो इस विधेयक के प्रभावी होने के बाद 195 हो जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 2029 तक होने वाले चुनाव पुरानी सीटों और पुरानी व्यवस्था के तहत ही संपन्न होंगे।
बिल के अध्ययन और ऐतिहासिक संदर्भ पर सुले का रुख
सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नया बिल अभी तक उन तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने सवाल किया कि बिना बिल देखे उस पर प्रतिक्रिया देना कैसे संभव है। सुले ने वादा किया कि जैसे ही बिल पेश होगा, वह 24 घंटे के भीतर उसका गहन अध्ययन करके अपना और पार्टी का रुख स्पष्ट कर देंगी। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह बिल एक समय संसद में केवल एक वोट से पास हुआ था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण बिल को सर्वसम्मति से पास किया जाना चाहिए ताकि देश की सभी महिलाओं को उनका हक मिल सके।
विपक्ष के नेताओं के साथ सलाह-मशविरा
अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए सुप्रिया सुले ने बताया कि उन्होंने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले विपक्षी गठबंधन के कई बड़े नेताओं से चर्चा की है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष, संजय राउत और बंटी पाटिल दादा के साथ विस्तार से बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने शरद पवार, जयंतराव और शशिकांत शिंदे से भी सलाह ली है। सुले ने कहा कि उन्होंने अपने सभी सांसदों और विधायकों को इस मामले की पूरी जानकारी दे दी है और उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही गलतफहमियों को दूर करने के लिए ही उन्होंने यह पीसी बुलाई है। उन्होंने कहा कि अक्सर रिपोर्टर अपने हेड ऑफिस के निर्देश पर सवाल पूछते हैं जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है, इसलिए पार्टी का पक्का रुख साफ करना जरूरी था।