सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की नए सिरे से होगी जांच

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सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड की नए सिरे से होगी जांच
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 2024 में हुई महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की है। रविवार को मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच कराने का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले में पुलिस अपने कर्तव्य का पालन करने में पूरी तरह से विफल रही है। यह घटना जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था, अब एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक जांच के केंद्र में है।

मृतक चिकित्सक की मां का अनुरोध और कानूनी आधार

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि सरकार ने यह बड़ा फैसला मृत चिकित्सक की मां के विशेष अनुरोध पर लिया है। मृतका की मां, रत्ना देबनाथ, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर इस मामले की नए सिरे से जांच करने की मांग की थी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि रत्ना देबनाथ के पत्र पर गंभीरता से विचार करते हुए उन्होंने मुख्य सचिव और विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम के साथ विस्तृत चर्चा की और इस गहन विचार-विमर्श के बाद, विशेष आयोग अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत मामले की नए सिरे से जांच करने की घोषणा की गई है।

पुलिस की विफलता और अंतिम संस्कार में लापरवाही के आरोप

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संवेदनशील मामले में पुलिस अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रही। इसके अतिरिक्त, शुभेंदु अधिकारी ने महिला चिकित्सक के अंतिम संस्कार के दौरान हुई कथित लापरवाही की भी अलग से जांच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जो भी लोग लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान की जाए और उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की जाए।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज घटनाक्रम का पूरा विवरण

यह मामला अगस्त 2024 का है, जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक महिला पोस्ट-ग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ वीभत्स घटना हुई थी। 9 अगस्त 2024 की सुबह अस्पताल के सेमिनार हॉल से महिला डॉक्टर का शव बरामद किया गया था। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि महिला डॉक्टर के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर बेरहमी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई। रिपोर्ट में उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान होने की बात भी सामने आई थी, जिससे पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा हो गया था।

विरोध प्रदर्शन और सीबीआई को जांच का हस्तांतरण

इस घटना के विरोध में देश भर के जूनियर डॉक्टरों ने हफ्तों तक लंबी हड़ताल की और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 अगस्त को अस्पताल के एक नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया था।

अदालती फैसला और अन्य गिरफ्तारियां

इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और जनवरी 2025 में कोलकाता की एक विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, मृतका के माता-पिता इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने दोषी के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। इसी दौरान, कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पर भी गंभीर आरोप लगे। उन पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप थे, जिसके बाद सीबीआई ने सितंबर 2024 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और एसआईटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नेशनल टास्क फोर्स (एनटीएफ) का गठन किया था और दिसंबर 2025 में शीर्ष अदालत ने इस मामले को वापस कलकत्ता हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया। मृतका के माता-पिता ने लगातार यह आशंका जताई थी कि इस अपराध में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। इसी आधार पर, कलकत्ता हाई कोर्ट ने मई 2026 में सीबीआई की एक 3 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया। यह टीम वर्तमान में इस बात की गहन जांच कर रही है कि क्या इस जघन्य अपराध में अन्य लोग भी शामिल थे।

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