सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सीजेपी प्रदर्शनकारी के वकील ऋषव रंजन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान संजय आजाद पर हुए कथित हमले से जुड़ा है। वकील ने विशेष रूप से आरोपी को जज के आवास पर पेश किए जाने और उसे केवल 1 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और कानूनी टीम को महत्वपूर्ण जानकारियों से दूर रखा गया है।
जज के घर पर पेशी को लेकर उठे सवाल
वकील ऋषव रंजन ने शनिवार को मीडिया के सामने अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए बताया कि जिस तरह से स्वतंत्र भारद्वाज को पेश किया गया, वह काफी अजीब था। उन्होंने कहा कि पूरी लीगल टीम कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में मौजूद थी और सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रही थी। हालांकि, बाद में उन्हें पता चला कि आरोपी को संबंधित जज के आवास पर पेश किया गया था। रंजन ने सवाल उठाया कि जब वकील कोर्ट में मौजूद थे, तो ऐसी क्या स्थिति थी कि पेशी जज के घर पर करनी पड़ी? उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान एक लीगल एड वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर वकील ने हैरानी जताई है और इसे सामान्य प्रक्रिया से अलग बताया है।
एक दिन की पुलिस कस्टडी पर आपत्ति
मामले की गंभीरता को देखते हुए वकील ने केवल 1 दिन की पुलिस कस्टडी दिए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। ऋषव रंजन के अनुसार, जिस अपराध को पुलिस ने गंभीर बताया है, उसमें इतनी कम अवधि की कस्टडी मांगना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने केवल 1 दिन की रिमांड क्यों मांगी? आमतौर पर गंभीर मामलों में पुलिस अधिक समय की कस्टडी की मांग करती है ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके और साक्ष्य जुटाए जा सकें। केवल 1 दिन की कस्टडी मिलने से पीड़ित पक्ष की कानूनी टीम असंतुष्ट नजर आ रही है और जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
FIR में जोड़ी गई धाराओं पर गोपनीयता का आरोप
वकील ऋषव रंजन ने दिल्ली पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर (FIR) में जोड़ी गई नई धाराओं और प्रावधानों के बारे में उनकी टीम को कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई विवरण नहीं मिला कि कौन से नए चार्ज जोड़े गए हैं और एफआईआर में क्या बदलाव किए गए हैं। रंजन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है। उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस ने अभी तक उन विशिष्ट धाराओं के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है जिनके तहत स्वतंत्र भारद्वाज पर कार्रवाई की जा रही है और सूचनाओं के इस अभाव ने कानूनी टीम के भीतर संदेह पैदा कर दिया है।
जंतर-मंतर घटना और वायरल पॉडकास्ट का विवाद
यह पूरा विवाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था। आरोप है कि इस दौरान स्वतंत्र भारद्वाज ने प्रदर्शनकारी के पिता संजय आजाद पर हमला किया था। मामला तब और बढ़ गया जब भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में इस घटना का जिक्र किया। उस पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि उन्होंने प्रदर्शनकारी के पिता का सिर फोड़ दिया है। हालांकि, बाद में उन्होंने अपने बयान में बदलाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह आत्मरक्षा में किया था। भारद्वाज का दावा था कि घटना के समय वह लोगों की भीड़ से घिरे हुए थे और अपनी सुरक्षा के लिए उन्हें कदम उठाना पड़ा। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में कहा था कि संजय आजाद को आई चोटें साधारण थीं और वे स्टील के ब्रेसलेट की वजह से लगी थीं।
गिरफ्तारी और कानूनी प्रावधान
सीजेपी प्रतिनिधियों द्वारा गिरफ्तारी की लगातार मांग के बाद, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। इसके बाद शनिवार को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस ने अब इस मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आपराधिक धमकी जैसी गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधान भी लागू किए गए हैं। यह कार्रवाई तब तेज हुई जब शुक्रवार को सीजेपी के सदस्यों ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। फिलहाल आरोपी 1 दिन की पुलिस हिरासत में है और मामले की जांच जारी है।