अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। तालिबान ने पाकिस्तान पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि इस्लामाबाद जानबूझकर अफगानिस्तान के साथ युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब और तुर्की के साथ किए गए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते से पीछे हटना है। मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तान इस समय एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहा है ताकि उसे अपनी अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा न करना पड़े। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं और पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर कई हवाई हमले किए हैं।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौता और पाकिस्तान की रणनीति
तालिबान के आरोपों के केंद्र में मक्का संयुक्त रक्षा समझौता है, जिस पर 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत यह प्रावधान किया गया था कि यदि इन तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करना और एक-दूसरे की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। हालांकि, ज़बिहुल्लाह मुजाहिद का कहना है कि पाकिस्तान अब इस समझौते से बाहर निकलना चाहता है। उनका आरोप है कि इस्लामाबाद यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह अफगानिस्तान के साथ युद्ध में फंसा हुआ है, ताकि जब सऊदी अरब को मदद की जरूरत हो, तो पाकिस्तान अपनी घरेलू सुरक्षा का हवाला देकर पीछे हट सके।
ज़बिहुल्लाह मुजाहिद का कंधार में संबोधन
गुरुवार को कंधार में एक धार्मिक मदरसे द्वारा आयोजित एक सभा में बोलते हुए ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान की नीतियों पर तीखा हमला किया और उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर किए गए हालिया हमले सऊदी अरब के साथ मक्का समझौते से बचने के उद्देश्य से किए गए थे। मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बार-बार सैन्य हमलों के माध्यम से अफगानिस्तान के साथ संघर्ष में उलझे रहकर एक खेल खेल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये हमले पाकिस्तान की घरेलू समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के उद्देश्य से किए गए थे। मुजाहिद के अनुसार, इस्लामाबाद जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा कर रहा है जिससे वह अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से बच सके और दुनिया को यह दिखा सके कि वह खुद एक बड़े संकट का सामना कर रहा है।
हवाई हमले और नागरिकों की मौत
यह विवाद तब और गहरा गया जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। अफगान अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने कंधार, पक्तिया और खोस्त सहित कई क्षेत्रों में 10 ठिकानों को निशाना बनाया। कंधार को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा का गढ़ माना जाता है, इसलिए वहां हमला होना काफी महत्वपूर्ण है। इन हमलों में 4 नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने पुष्टि की है कि उनकी सेना ने अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, इस्लामाबाद ने सभी ठिकानों की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन पर आतंकवादी पनाहगाह बनाने की अनुमति दे रहा है और वहां से पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियां और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं।
बढ़ता तनाव और भविष्य की चुनौतियां
पाकिस्तान इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए एक जरूरी कार्रवाई बता रहा है, जबकि काबुल इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों के बीच पाकिस्तान की चुप्पी और अब अफगानिस्तान के साथ उसका यह संघर्ष मक्का पैक्ट की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहा है। तालिबान का मानना है कि पाकिस्तान अपनी अलग रणनीति बना रहा है और वह सऊदी की मदद के लिए आगे नहीं आना चाहता। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के भविष्य पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दोनों देशों के बीच का यह वाकयुद्ध अब सैन्य कार्रवाई में बदल चुका है, जिससे आने वाले समय में स्थिति और भी जटिल होने की संभावना है।