टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है, जो टाटा ग्रुप की भविष्य की दिशा को स्पष्ट करता है। दिल्ली में आयोजित 2026 ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप उन उत्पादों और तकनीकों का निर्माण जारी रखेगा जिनकी भारत और पूरी दुनिया को वर्तमान और भविष्य में आवश्यकता है। चंद्रशेखरन ने विशेष रूप से सेमीकंडक्टर चिप निर्माण पर जोर दिया और कहा कि भले ही इन परियोजनाओं को पूरा करने में उम्मीद से अधिक समय लगे, लेकिन समूह इस दिशा में अपने प्रयासों को कम नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब टाटा ग्रुप के भीतर नेतृत्व और महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर बोर्ड स्तर पर कुछ मतभेद और विवादों की खबरें सामने आ रही हैं। इन आंतरिक चुनौतियों के बावजूद, समूह का लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है और वह अपनी क्षमताओं के दम पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की विशाल योजना
लगभग 160 साल पुराने टाटा ग्रुप का व्यापारिक साम्राज्य लगातार विस्तार कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में समूह का कुल कारोबार लगभग 185 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। अब समूह अपने विकास के अगले चरण की ओर कदम बढ़ा रहा है, जिसके लिए लगभग 120 अरब डॉलर यानी 10 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक के निवेश की एक व्यापक योजना तैयार की गई है। इस भारी-भरकम निवेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को स्थापित करने में खर्च किया जाएगा। टाटा ग्रुप देश के भीतर बड़े स्तर पर चिप बनाने वाली फैक्ट्रियां तैयार करने की प्रक्रिया में है। ये सेमीकंडक्टर चिप्स आज के दौर में मोबाइल फोन, कारों, कंप्यूटरों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कई अन्य आधुनिक तकनीकों के लिए अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं।
चिप मैन्युफैक्चरिंग में चुनौतियां और अवसर
एन चंद्रशेखरन ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के पास प्रतिभाशाली कार्यबल, एक विशाल बाजार और बड़े पैमाने पर निर्माण करने की क्षमता मौजूद है। जैसे-जैसे दुनिया भर में आधुनिक तकनीक पर आधारित उत्पादन यानी एडवांस मैन्युफैक्चरिंग का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे चिप की मांग में भी भारी बढ़ोतरी होगी। इसी भविष्य को देखते हुए टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए निवेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को देश की पहली बड़े स्तर की चिप निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने के दौरान कुछ परिचालन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ये समस्याएं तकनीकी और प्रक्रियात्मक स्तर पर हैं, जिन्हें दूर करने के लिए समूह लगातार प्रयास कर रहा है।
मुश्किलों के बावजूद ग्रुप की मजबूत ग्रोथ
हाल के समय में टाटा ग्रुप को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। समूह की विमानन कंपनी एयर इंडिया को बड़े विमान हादसों, साइबर हमलों और वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों जैसी गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ा है। इसके साथ ही, ग्रुप के आंतरिक बोर्ड स्तर पर भी मतभेदों की स्थिति बनी हुई है और चेयरमैन चंद्रशेखरन ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि समूह के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है और यह सफर आसान नहीं था। इन तमाम मुश्किलों और विवादों के बावजूद, टाटा ग्रुप के वित्तीय प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है और समूह के मार्जिन स्थिर बने हुए हैं और इसकी विकास दर दोहरे अंकों में दर्ज की गई है। चंद्रशेखरन का पूरा जोर इस बात पर है कि टाटा ग्रुप भारत और वैश्विक बाजार की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना निवेश जारी रखेगा, जिसमें सेमीकंडक्टर निर्माण सबसे प्रमुख हिस्सा है।