टेक कंपनियों में छंटनी और एआई का असर, मुनाफे के बाद भी क्यों घट रहे हैं पद

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टेक कंपनियों में छंटनी और एआई का असर, मुनाफे के बाद भी क्यों घट रहे हैं पद
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दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियां इस समय एक अनूठे और हैरान करने वाले दौर से गुजर रही हैं। एक तरफ जहां ये कंपनियां रिकॉर्ड कमाई कर रही हैं और उनका कारोबार लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं दूसरी तरफ वे बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की संख्या में कटौती कर रही हैं या उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल सबसे बड़ी वजह के रूप में सामने आ रहा है। यह सवाल हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब कारोबार शानदार चल रहा है और मुनाफा लगातार बढ़ रहा है, तो फिर टेक कंपनियों को अपने कर्मचारियों की छुट्टी करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

माइक्रोसॉफ्ट का वॉलंटरी एग्जिट ऑफर और रिकॉर्ड कमाई

इस नई प्रवृत्ति का सबसे ताजा और बड़ा उदाहरण माइक्रोसॉफ्ट कंपनी है। माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 60 हजार कर्मचारियों को वॉलंटरी एग्जिट ऑफर देने का फैसला किया है। इस ऑफर के तहत कर्मचारी अपनी मर्जी से कंपनी छोड़ सकते हैं और इसके बदले उन्हें तय शर्तों के अनुसार विभिन्न वित्तीय और अन्य लाभ मिल सकते हैं और भले ही इसे सीधे तौर पर जबरन छंटनी न कहा जाए, लेकिन यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कंपनी अपने कार्यबल यानी कर्मचारियों की कुल संख्या को कम करना चाहती है। वर्तमान में माइक्रोसॉफ्ट में दुनिया भर में करीब 2 लाख 23 हजार फुलटाइम कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी को यह उम्मीद है कि इस वॉलंटरी एग्जिट ऑफर को लगभग 3 हजार या उससे कम कर्मचारी ही स्वीकार करेंगे। हैरानी की बात यह है कि माइक्रोसॉफ्ट ने यह बड़ा कदम ऐसे समय में उठाया है जब कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत है और उसकी कमाई लगातार बढ़ रही है। 3 अरब डॉलर का अब तक का रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब कंपनी का कारोबार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है और भारी मुनाफा हो रहा है, तो फिर कर्मचारियों की संख्या में कटौती करने या उन्हें कम करने की आवश्यकता क्यों महसूस हो रही है?

अन्य प्रमुख टेक कंपनियों का बदला हुआ रुख और छंटनी के आंकड़े

माइक्रोसॉफ्ट अकेली ऐसी टेक कंपनी नहीं है जो इस तरह के रणनीतिक बदलाव कर रही है, बल्कि दुनिया की अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी इसी राह पर चल रही हैं। 3 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा था। इसके बावजूद कंपनी ने 30 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी करने का बड़ा कदम उठाया। 9 अरब डॉलर पर पहुंच गया, लेकिन इसके बावजूद इस साल कंपनी के 16 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की नौकरी चली गई। इन सभी आंकड़ों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि मुनाफा और रेवेन्यू में बढ़ोतरी अब कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं रह गई है। टेक जगत में काम करने का पूरा तरीका और बिजनेस मॉडल तेजी से बदल रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप बड़े पैमाने पर कर्मचारियों पर तलवार लटक रही है।

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे बदल रहा है काम करने का तरीका

इन सभी बड़े फैसलों के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को सबसे मुख्य और निर्णायक वजह माना जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और ओरेकल जैसी दिग्गज टेक कंपनियां एआई तकनीक पर अरबों डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर रही हैं। वे अपने रोजाना के व्यावसायिक कार्यों और संचालन में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रही हैं, ताकि कम से कम कर्मचारियों की मदद से ज्यादा से ज्यादा और बेहतर काम किया जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईआईएम यानी IMI कोलकाता की असिस्टेंट प्रोफेसर रुचि शर्मा ने इस विषय पर विस्तार से बताते हुए कहा है कि टेक कंपनियों में छंटनी या कर्मचारियों की संख्या घटाने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि उनका पुराना कारोबार या बिजनेस खराब चल रहा है। कई बार कंपनियां भविष्य की जरूरतों, तकनीकी बदलावों और नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए अपने काम करने के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देती हैं और रिपोर्ट में एक अन्य विशेषज्ञ का यह भी कहना है कि अब टेक कंपनियां तेजी से अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के पुराने दौर को पीछे छोड़ चुकी हैं। इसके बजाय वे अपने खर्चों को कम करने और काम की क्षमता तथा उत्पादकता को सुधारने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

एआई के इस नए दौर में युवाओं और छात्रों को क्या कदम उठाने चाहिए

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते और व्यापक इस्तेमाल से आने वाले समय में पूरी दुनिया का नौकरी का बाजार और अधिक बदल सकता है। विशेषज्ञों का यह मानना है कि एआई के आने से इंसानों की जरूरत पूरी तरह से समाप्त नहीं होगी, बल्कि इंसानों की भूमिका का दायरा बदल जाएगा। रचनात्मक सोच यानी क्रिएटिविटी, सही और सटीक फैसले लेने की क्षमता, ग्राहकों की वास्तविक जरूरत को समझना और जिम्मेदारी जैसे जटिल कामों में इंसानों की भूमिका हमेशा की तरह बेहद अहम बनी रहेगी। आज के दौर में युवाओं को सिर्फ पारंपरिक किताबों तक ही अपनी पढ़ाई को सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें तकनीकी रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। युवाओं को प्रोग्रामिंग, डेटाबेस और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की मजबूत और व्यावहारिक समझ विकसित करनी चाहिए। आज के छात्र क्लाउड और कोडेक्स यानी Claude और Codex जैसे अत्याधुनिक एआई टूल्स की मदद से बहुत आसानी से कोडिंग सीख सकते हैं। ये आधुनिक एआई टूल्स न केवल कोड की जटिल गलतियों को समझाने में मदद करते हैं, बल्कि उसे और अधिक बेहतर बनाने तथा विभिन्न प्रकार के प्रोजेक्ट्स को तैयार करने में भी छात्रों और डेवलपर्स का पूरा सहयोग करते हैं। इसलिए समय की मांग यही है कि युवा खुद को एआई के अनुकूल ढालें और अपनी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करते रहें ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक किया जा सके।

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