हिंदी सिनेमा के जाने-माने डायरेक्टर आनंद एल और राय, जिन्होंने 2013 में बनारस की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘रांझणा’ जैसी सफल फिल्म दी थी, एक बार फिर एक तरफा मोहब्बत की कहानी लेकर आए हैं. उनकी हालिया रिलीज फिल्म ‘तेरे इश्क में’ को ‘रांझणा’ की तर्ज पर बनाने की कोशिश की गई थी, जिसमें धनुष और कृति सेनन मुख्य भूमिकाओं में हैं. हालांकि, फिल्म ने रिलीज के तीन दिनों में ही 52 करोड़ रुपये का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करके धमाका कर दिया है, लेकिन इसमें कई ऐसी कमियां रह गई हैं, जो दर्शकों को निराश कर सकती हैं. ‘रांझणा’ के लेखक हिमांशु शर्मा ने नीरज यादव के साथ मिलकर इस फिल्म की कहानी लिखी है, लेकिन लगता है कि इस बार वे लॉजिक का ध्यान रखना भूल गए हैं.
कहानी की उलझन
‘तेरे इश्क में’ की कहानी ‘महारानी 4’ वेब सीरीज के डायलॉग “जब-जब आपको लगता है कि बिहार को आप समझ गए हैं, तब-तब बिहार आपको झटका देता है” की तरह ही है और 2 घंटे 47 मिनट की इस फिल्म में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जहां दर्शक को लगता है कि वे कहानी को समझ गए हैं, लेकिन तभी कोई नया ट्रैक या सस्पेंस सामने आता है, जिससे यह एक रोमांटिक-म्यूजिकल फिल्म के बजाय साइकोलॉजिकल सस्पेंस थ्रिलर लगने लगती है. ‘रांझणा’ की सबसे खास बात उसकी सीधी और एकतरफा प्रेम कहानी थी, जिसमें जोया के लिए कुंदन का प्यार और उसके लिए कुछ भी कर गुजरने की कहानी थी और इसके विपरीत, ‘तेरे इश्क में’ में एक नहीं, बल्कि कई कहानियां हैं.
शंकर का मुक्ति के प्रति प्यार, शंकर के पिता का अपने बेटे के प्यार के चक्कर में जान गंवाना और उनका. बेटे को फाइटर जेट उड़ाने का सपना, और एयरफोर्स की कहानी जहां सबसे हुनरमंद पायलट मानसिक तनाव से जूझ रहा है. कहानी की शुरुआत में ऐसा लगता है कि दर्शक गलती से कोई और फिल्म देख रहे हैं, लेकिन. धैर्य रखने पर पता चलता है कि फिल्म सही है, बस इसे गलत दिशा में ले जाया गया है.
पहला घंटा बेहद नीरस
फिल्म का पहला हाफ काफी फीका और नीरस है, जबकि सेकेंड हाफ कुछ हद तक ठीक लगता है, हालांकि क्लाइमेक्स ‘रांझणा’ जैसा प्रभावशाली नहीं है. शंकर (धनुष) दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन फिल्म में उसे पढ़ते हुए एक भी सीन नहीं दिखाया गया है. वहीं, मुक्ति (कृति सेनन) अपनी पीएचडी के लिए 2200 पन्नों का थीसिस तैयार करती है, लेकिन उसके प्रोफेसर उसके टॉपिक का मजाक उड़ाते हैं और फिल्म में कुछ मजबूत डायलॉग्स हैं, जैसे “अगर मैं प्यार पड़ गया तो पूरी दिल्ली जला दूंगा”, लेकिन दूसरी तरफ कई ऐसे वनलाइनर पंचलाइन भी हैं, जिन्हें वल्गर पंचलाइन कहना ज्यादा सही होगा, क्योंकि भाषा और मर्यादा का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा गया है.
लॉ स्टूडेंट को UPSC का ज्ञान नहीं
फिल्म के टीजर, ट्रेलर और अन्य प्रमोशनल सामग्री में ‘तेरे इश्क में’ टाइटल सॉन्ग का भरपूर इस्तेमाल किया गया था, जिससे दर्शकों में गाने के प्रति उत्सुकता बढ़ी थी. हालांकि, फिल्म में इस गाने का सही से इस्तेमाल करना मेकर्स भूल गए. फिल्म में कहीं भी ऐसी कोई सिचुएशन क्रिएट नहीं की गई है, जहां 3 मिनट के इस गाने को उचित जगह मिल सके और फिल्म में कई इंटेंस सीन हैं, जहां इस गाने का इस्तेमाल करके उन दृश्यों को और भी मजबूत बनाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया.
फिल्म में इस गाने का इस्तेमाल केवल एक जगह पर किया गया है, जो इसकी क्षमता को पूरी तरह से भुना नहीं पाया. धनुष का किरदार शंकर एक लॉ स्टूडेंट होने के साथ-साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष भी है. हालांकि, उसके किरदार की सबसे कमजोर बात यह है कि एक लॉ का छात्र और स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष होने के बावजूद उसे UPSC के बारे में नहीं पता है और उसे बस इतना मालूम है कि यह एक एग्जाम है, और अगर उसे अपना प्यार पाना है तो उसे यह एग्जाम पास करना होगा. शंकर की भाषा में UPSC का फुल फॉर्म ‘उत्तर प्रदेश सेकेंडरी स्कूल’ बताया गया है, जो एक पढ़े-लिखे किरदार के लिए अविश्वसनीय लगता है और कहानी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है.
कृति सेनन के किरदार की खामी
सिर्फ धनुष ही नहीं, कृति सेनन के किरदार ‘मुक्ति’ में भी राइटर को और काम करने की जरूरत थी. इस कैरेक्टर की सबसे बड़ी खामी यह है कि उसने साइकोलॉजी में पीएचडी कर रखी है, वह एक साइकोलॉजिस्ट है और डिफेंस में काउंसलर के तौर पर काम करती है. उसका काम लोगों को मानसिक तनाव से बाहर निकालना है, लेकिन वह खुद ही मानसिक तनाव से परेशान है और यह विरोधाभास किरदार की गहराई को कम करता है और दर्शकों के लिए उसे समझना मुश्किल बनाता है. कुल मिलाकर, फिल्म में कमियां बहुत हैं, जिन्हें अगर पूरा बताया जाए तो स्पॉइलर देना पड़ जाएगा. संक्षेप में कहें तो, अगर आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं, तो आपको. लॉजिक से किनारा करना पड़ेगा और कहानी की कई खामियों को नजरअंदाज करना होगा.