टीएमसी सांसद कोयल मल्लिक का राज्यसभा से इस्तीफा, ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका

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टीएमसी सांसद कोयल मल्लिक का राज्यसभा से इस्तीफा, ममता बनर्जी को लगा बड़ा झटका
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तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और टॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और इसे पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। राज्यसभा से इस्तीफा देने के तुरंत बाद कोयल मल्लिक ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात का आधिकारिक कारण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात और अटकलें

इस्तीफे के तुरंत बाद कोयल मल्लिक का केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मिलना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मुलाकात ने उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या कोयल मल्लिक किसी नए राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाली हैं। बता दें कि इससे पहले भी टीएमसी के कुछ अन्य राज्यसभा सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफे दिए थे, जिसके बाद से ही कोयल मल्लिक के अगले कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता के साथ उनकी यह मुलाकात राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही है।

संसद के एक भी सत्र में शामिल नहीं हुईं कोयल मल्लिक

कोयल मल्लिक के राज्यसभा कार्यकाल की एक खास बात यह रही कि वह सांसद बनने के बाद संसद के एक भी सत्र में शामिल नहीं हुईं। कोयल मल्लिक उर्फ रुक्मिणी मल्लिक को 27 फरवरी 2026 को तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल से 2026 के राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद 16 मार्च 2026 को हुए चुनाव में वह निर्वाचित हुईं और 6 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में उन्होंने शपथ ली थी। टॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री के रूप में पहचान रखने वाली कोयल मल्लिक के राजनीति में आने को टीएमसी का बड़ा दांव माना गया था, लेकिन राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाने से पहले ही उनके इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 साल बाद टीएमसी के हाथ से निकली सत्ता

इस साल हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुए। करीब 15 वर्षों तक राज्य की सत्ता पर काबिज रहने वाली पार्टी को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। इन चुनावों में टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट कर रह गई। वहीं दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने 208 सीटें जीतकर पहली बार पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाई। सत्ता परिवर्तन के इस दौर में टीएमसी के भीतर भी काफी उथल-पुथल देखने को मिली है, जिसने पार्टी की नींव को हिलाकर रख दिया है।

पार्टी में बगावत और दो गुटों में विभाजन

चुनाव परिणाम आने के लगभग एक महीने बाद, जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। पार्टी के भीतर बगावत के सुर तेज हुए और संगठन दो स्पष्ट गुटों में बंट गया। इस दौरान कई विधायकों और सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अपना अलग गुट बना लिया। पार्टी में मची इस भगदड़ और आंतरिक कलह ने संगठन की मुश्किलों को और अधिक बढ़ा दिया है। कोयल मल्लिक का इस्तीफा इसी राजनीतिक अस्थिरता के बीच आया है, जिसे पार्टी के लिए एक और बड़ी क्षति माना जा रहा है। टीएमसी अब अपने बचे हुए कुनबे को संभालने की चुनौती से जूझ रही है।

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