अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नागरिकता के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो नए कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप प्रशासन का यह कदम सुप्रीम कोर्ट से मिले हालिया झटके के बाद आया है, जिसमें अदालत ने जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की उनकी पिछली कोशिशों को खारिज कर दिया था। इन नए आदेशों के माध्यम से ट्रंप सरकार ने एक बार फिर अमेरिकी नागरिकता के दायरे को सीमित करने का प्रयास किया है।
नए कार्यकारी आदेश और उनके प्रावधान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को घोषणा की कि वह दो नए इमिग्रेशन संबंधी कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। इनमें से पहला आदेश उन लोगों की संख्या को सीमित करने पर केंद्रित है जो अमेरिका में पैदा होने के बाद स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता के लिए पात्र हो जाते हैं और दूसरा आदेश विशेष रूप से उन लोगों को रोकने के लिए बनाया गया है जो केवल बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से अमेरिका की यात्रा करते हैं, जिसे आमतौर पर बर्थ टूरिज्म कहा जाता है।
नए नियमों के तहत, कुछ विशिष्ट श्रेणियों के बच्चों को अब जन्म के आधार पर स्वचालित रूप से नागरिकता नहीं दी जाएगी।
- विदेशी दूतावासों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े कर्मियों के बच्चे।
- दुश्मन विदेशी यानी एलियन एनिमीज माने जाने वाले लोगों के बच्चे।
- यदि किसी बच्चे के माता-पिता ने अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी की है।
बर्थ टूरिज्म पर लगाम लगाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने उन लोगों के वीजा पर प्रतिबंध बढ़ाने का निर्णय लिया है जो केवल बच्चे को जन्म देने और उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाने के इरादे से अमेरिका आते हैं। ट्रंप का मानना है कि ये कदम अमेरिकी नागरिकता की गरिमा को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया
यह घटनाक्रम जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले के बाद आया है, जिसमें अदालत ने ट्रंप की उन पिछली कोशिशों को खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे अमेरिकी नागरिक नहीं हो सकते। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, "मुझे लगा था कि हम सुप्रीम कोर्ट में जीतेंगे और दुर्भाग्य से, हमें एक बुरा फैसला मिला, बहुत अनुचित फैसला।
ट्रंप का मानना है कि उनके ये नए फैसले संवैधानिक रूप से वैध होंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को फिर से उठाना उनके प्रशासन की उस सक्रियता को दर्शाता है जिसके तहत वे अमेरिकी नागरिक बनने वालों की संख्या को नियंत्रित करना चाहते हैं।
विशेषज्ञों की राय और संवैधानिक तर्क
इमिग्रेशन विशेषज्ञों और कई कानूनी जानकारों के बीच इन आदेशों को लेकर अलग-अलग मत हैं। कई विशेषज्ञों का तर्क है कि अमेरिकी संविधान में यह स्पष्ट रूप से परिभाषित है कि किसे नागरिक माना जाएगा। उनका कहना है कि जन्म के आधार पर नागरिकता देने की परंपरा से अमेरिका को लाभ होता है, क्योंकि यह देश के भविष्य में सभी की समान भागीदारी सुनिश्चित करती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संविधान का 14वां संशोधन जन्मसिद्ध नागरिकता की गारंटी देता है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि विदेशी दूतावास कर्मियों और दुश्मन विदेशियों जैसी श्रेणियों को इस अधिकार से बाहर रखा जा सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये नए आदेश कानूनी चुनौतियों का सामना कर पाएंगे और क्या अदालतें इन्हें संवैधानिक मानेंगी।