ट्रंप का दावा ईरान के साथ युद्ध खत्म और परमाणु हथियारों पर लगी रोक

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ट्रंप का दावा ईरान के साथ युद्ध खत्म और परमाणु हथियारों पर लगी रोक
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब समाप्त हो गया है। जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में आयोजित एक ऑनलाइन रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि तेहरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने की शर्त पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखना ही उनका मुख्य लक्ष्य था और उनकी सरकार का 95 प्रतिशत ध्यान इसी एक बिंदु पर केंद्रित था। राष्ट्रपति के इस दावे ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, हालांकि ईरान की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय

ट्रंप ने खुलासा किया कि उन्होंने ईरान पर किए जाने वाले नए हवाई और मिसाइल हमलों को रद्द करने का आदेश दिया है। इन हमलों की चेतावनी पहले दी गई थी, लेकिन अब शांति वार्ता में प्रगति को देखते हुए इन्हें रोक दिया गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि बातचीत ईरान के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुकी है और वहां से इसे मंजूरी भी मिल गई है। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच एक मजबूत समझौते का मसौदा तैयार कर लिया गया है, जो युद्ध को पूरी तरह से रोकने में सक्षम है। ट्रंप का मानना है कि यह कूटनीतिक जीत क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते को इजराइल, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्किये और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय देशों का समर्थन प्राप्त है।

ईरान की प्रतिक्रिया और संशय

दूसरी तरफ, ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने ट्रंप के इन दावों पर सवाल उठाए हैं। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिछले दो महीनों के दौरान ट्रंप 38 बार इस तरह के दावे कर चुके हैं कि वे किसी समझौते के बहुत करीब हैं। ईरानी मीडिया ने चेतावनी दी है कि जब तक ईरान खुद किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं करता, तब तक ट्रंप के बयानों को अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। यह स्थिति दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच अभी भी विश्वास की कमी है। इसके अलावा, वार्ता की जानकारी रखने वाले एक राजनयिक ने बताया कि हालांकि समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर कई हफ्ते पहले ही सहमति बन गई थी, लेकिन अभी भी इसके विफल होने की 50 प्रतिशत संभावना बनी हुई है। कई ऐसे अनसुलझे कारण हैं जो आखिरी समय में इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं।

होर्मुज की नाकेबंदी और भविष्य की योजना

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक कि समझौते को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता। उन्होंने बताया कि इस शांति समझौते पर इसी वीकेंड यूरोप में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह शायद खुद इस कार्यक्रम में शामिल न हो सकें, लेकिन उनकी जगह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां मौजूद रहेंगे। ट्रंप के अनुसार, जैसे ही समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, होर्मुज स्ट्रेट को आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए फिर से खोल दिया जाएगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह समझौता वास्तव में धरातल पर उतर पाएगा या यह केवल दावों तक ही सीमित रहेगा। इजराइल जैसे देश पहले ही ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर अपनी शंकाएं जाहिर कर चुके हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाती है।

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