अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुचर्चित गोल्ड कार्ड वीजा योजना वर्तमान में अपनी उम्मीदों के मुताबिक रफ्तार पकड़ने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। अमीर विदेशी निवेशकों को तेज अमेरिकी रेजिडेंसी देने के बड़े दावों के साथ लॉन्च किए गए इस प्रीमियम इमिग्रेशन प्रोग्राम को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी, वित्तीय और नैतिक चिंताएं काफी गहरी होती जा रही हैं और इस योजना के तहत विदेशी नागरिकों को $1 मिलियन से लेकर $5 मिलियन तक का भारी-भरकम निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई बड़े इमिग्रेशन वकीलों ने अपने क्लाइंट्स को इस योजना से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना में निवेश करना एक बड़े जोखिम को निमंत्रण देने जैसा है, जिसके कारण रईस विदेशी अब इससे दूरी बना रहे हैं।
आंकड़ों में योजना की विफलता और सीमित रुचि
ट्रंप प्रशासन ने इस स्कीम को एक विशेष और प्रीमियम इमिग्रेशन रास्ते के तौर पर पेश किया था, जिसमें विदेशी नागरिकों को भारी निवेश के बदले विशेष रेजिडेंसी लाभ देने की बात कही गई थी। हालांकि, हालिया सरकारी आंकड़े इस योजना की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस योजना के लिए केवल 338 रिक्वेस्ट ही जमा की गई हैं, जो प्रशासन की उम्मीदों से काफी कम हैं। इन आवेदकों में से केवल 165 लोगों ने ही $15,000 की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस जमा करने का साहस दिखाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आगे की जटिल प्रक्रिया तक महज 59 आवेदक ही पहुंच सके हैं, जो यह दर्शाता है कि अमीर निवेशक इस योजना की शर्तों और भविष्य को लेकर कितने आशंकित हैं।
कानूनी आधार की कमजोरी और विशेषज्ञों की चेतावनी
इमिग्रेशन कानून विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस योजना की सबसे बड़ी और बुनियादी कमजोरी इसका कानूनी आधार है। जहां पारंपरिक EB-5 निवेशक वीजा प्रोग्राम को अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त है, वहीं इस गोल्ड कार्ड योजना को केवल एक एग्जीक्यूटिव एक्शन (कार्यकारी कार्रवाई) के जरिए लागू किया गया है। यही वह मुख्य कारण है जिससे कई वकीलों और कानूनी सलाहकारों को यह डर सता रहा है कि भविष्य में कोई भी नया प्रशासन इस योजना को एक झटके में खत्म कर सकता है। इस अनिश्चितता ने निवेशकों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है, क्योंकि वे अपनी करोड़ों की धनराशि को किसी ऐसी योजना में नहीं लगाना चाहते जिसका भविष्य अधर में लटका हो।
माइकल वाइल्ड्स का कड़ा रुख और EB-5 से तुलना
जाने-माने इमिग्रेशन वकील माइकल वाइल्ड्स ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखी है और कहा है कि वह गोल्ड कार्ड आवेदकों का केस लेने से साफ इनकार करेंगे। उनके अनुसार, इस प्रोग्राम की वैधता और इसके भविष्य को लेकर इतनी अधिक अनिश्चितता व्याप्त है कि क्लाइंट्स को इसमें शामिल होने की सलाह देना या उनका केस लड़ना पूरी तरह से अनैतिक होगा और विशेषज्ञों का तर्क है कि मौजूदा EB-5 प्रोग्राम निवेशकों के लिए गोल्ड कार्ड की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प है। EB-5 प्रोग्राम के तहत विदेशी नागरिक अमेरिकी प्रोजेक्ट्स में कम से कम $800,000 का निवेश करके ग्रीन कार्ड हासिल कर सकते हैं, बशर्ते उस निवेश से अमेरिका में नई नौकरियां पैदा हों।
बदलती कीमतें और राजस्व के दावों पर सवाल
गोल्ड कार्ड योजना को लेकर भ्रम की स्थिति इसकी बदलती कीमतों के कारण और भी अधिक बढ़ गई है। प्रशासन के अलग-अलग अधिकारियों ने निवेश की राशि को लेकर विरोधाभासी बयान दिए हैं, जिसमें कभी $1 मिलियन तो कभी $5 मिलियन तक की राशि बताई गई। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों के लिए लगने वाले अतिरिक्त शुल्क और भारी प्रोसेसिंग फीस ने भी संभावित निवेशकों की चिंता को दोगुना कर दिया है। हालांकि ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह योजना अमेरिका के लिए अरबों डॉलर का राजस्व ला सकती है, लेकिन अब तक के आंकड़े इस दावे को पूरी तरह कमजोर साबित कर रहे हैं और इसके बावजूद, कुछ देशों के धनी नागरिक अब भी इस प्रोग्राम में रुचि दिखा रहे हैं, विशेषकर वे लोग जो अपने देशों के सख्त इमिग्रेशन नियमों से परेशान हैं और किसी भी तरह अमेरिका में बसना चाहते हैं।