संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का महत्वाकांक्षी ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम अब दुनिया के इतिहास का सबसे महंगा रक्षा प्रोजेक्ट बनने की ओर अग्रसर है और 2 ट्रिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 100 लाख करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। 76 लाख करोड़ रुपये में तैयार हो जाने की बात कही थी। CBO की यह रिपोर्ट इस प्रोजेक्ट की वित्तीय जटिलताओं और इसके विशाल पैमाने को रेखांकित करती है।
रूस और चीन के खतरों से निपटने की रणनीति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान की थी। इस प्रोजेक्ट के पीछे का मुख्य तर्क यह है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देशों द्वारा विकसित किए गए आधुनिक मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा और गंभीर खतरा बन चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए अमेरिका को एक ऐसी अंतरिक्ष-आधारित मजबूत मिसाइल रक्षा प्रणाली की आवश्यकता है, जो अभेद्य हो और इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए 'गोल्डन डोम' की परिकल्पना की गई है, जो अमेरिका को मिसाइल हमलों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
क्या है 'गोल्डन डोम' और इसकी कार्यप्रणाली?
यह प्रोजेक्ट इजरायल के विश्व प्रसिद्ध ‘आयरन डोम’ रक्षा प्रणाली से प्रेरित है, लेकिन इसका तकनीकी दायरा और कवरेज क्षेत्र उससे कहीं अधिक व्यापक और जटिल है। यह केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरिक्ष और जमीन का एक अनूठा मेल देखने को मिलेगा।
लागत का विवरण और वित्तीय चुनौतियां
CBO की रिपोर्ट में लागत का जो विश्लेषण किया गया है, वह चौंकाने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट में से सिर्फ अंतरिक्ष (Space) आधारित सिस्टम को विकसित करने और तैनात करने पर ही करीब 45 लाख करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण चिंता यह भी जताई गई है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है कि कुल कितने सिस्टम लगाए जाएंगे और उनकी वास्तविक मारक क्षमता क्या होगी। स्पष्टता की इस कमी के कारण, विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस प्रोजेक्ट की असली लागत अनुमानित आंकड़ों से भी अधिक बढ़ सकती है और हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए शुरुआती तौर पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी है।
राजनीतिक विरोध और भविष्य की समयसीमा
इस प्रोजेक्ट को लेकर अमेरिका के भीतर राजनीतिक मतभेद भी उभर कर सामने आए हैं और डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने इस प्रोजेक्ट की कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि यह एक अत्यधिक महंगा कार्यक्रम साबित हो सकता है, जिसका मुख्य लाभ केवल बड़ी रक्षा कंपनियों को होगा। विपक्ष का कहना है कि इस विशाल वित्तीय खर्च का अंतिम बोझ अमेरिकी जनता पर पड़ेगा। दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले सप्ताह में ही इसके लिए आवश्यक आदेश जारी कर दिए थे। उनका लक्ष्य है कि जनवरी 2029 तक यह 'गोल्डन डोम' सिस्टम पूरी तरह से क्रियान्वित हो जाए और काम करना शुरू कर दे। हालांकि, बजट की भारी मांग और अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती जैसी तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए, इस समयसीमा को पूरा करना एक अत्यंत कठिन कार्य नजर आता है।
यदि यह योजना अपनी पूरी क्षमता के साथ लागू की जाती है, तो 'गोल्डन डोम' न केवल अमेरिकी इतिहास का, बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे महंगा मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम बन जाएगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद मिसाइल हमलों से अमेरिका की 100% सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके लिए भारी बजट और अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती जैसी बड़ी बाधाओं को पार करना होगा।