अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि ईरान अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। उन्होंने कसम खाई कि तेहरान को अमेरिका से एक भी सेंट यानी एक भी पैसा प्राप्त नहीं होगा। राष्ट्रपति का दावा है कि हालिया युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है, जिससे वह देश अब बिना किसी प्रभावी रक्षा प्रणाली के रह गया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की सैन्य शक्ति अब उस स्तर पर नहीं रही जहां वह अमेरिका या उसके सहयोगियों के लिए कोई बड़ी चुनौती पेश कर सके।
सैन्य क्षमताओं का विनाश
ट्रुथ सोशल पर साझा किए गए अपने संदेशों में, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति का विस्तार से विवरण दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण ईरान की सैन्य ताकत में भारी गिरावट आई है। ट्रंप ने लिखा कि अब ईरान के पास न तो वायुसेना बची है और न ही नौसेना। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब कोई एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण, रडार या वास्तव में कुछ भी महत्वपूर्ण रक्षा सामग्री शेष नहीं है और उनके अनुसार, ईरान अब पूरी तरह से रक्षाहीन हो चुका है और उसकी सैन्य मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। इसी आधार पर उन्होंने तर्क दिया कि ईरान अब बातचीत के लिए मजबूर है क्योंकि उसके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
डेमोक्रेट्स पर साधा निशाना
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस दौरान अपने राजनीतिक विरोधियों यानी डेमोक्रेट्स पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने इस बात का मजाक उड़ाया कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि ईरान चार महीने पहले की तुलना में अब बेहतर स्थिति में है। ट्रंप ने सवाल किया कि क्या आप सोच सकते हैं कि वे इस तरह की बातों से बच निकलेंगे? उन्होंने विरोधियों को बेवकूफ बताते हुए कहा कि लड़ाई के बाद तेहरान ने खुद बातचीत की कोशिश की थी, न कि वॉशिंगटन ने और ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी हताशा में बातचीत नहीं कर रहा है, बल्कि ईरान हताशा में है क्योंकि वे खत्म हो चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वे कूटनीतिक प्रयासों के दौरान भी अपना सख्त रुख बरकरार रखेंगे।
14 सूत्रीय समझौता और शर्तें
बुधवार शाम को एक बड़ी कूटनीतिक घटनाक्रम में, राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य 28 फरवरी को अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध को समाप्त करना है। इस समझौते के तहत, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 60 दिनों तक बातचीत चलने की उम्मीद है। इस समय सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों पर किसी अंतिम समझौते तक पहुंचा जा सके और हालांकि, ट्रंप ने वित्तीय राहत की संभावना को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि हम 60 दिन का खेल खेलेंगे लेकिन उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, दस सेंट भी नहीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और मध्यस्थता
इस समझौते की शर्तों के अनुसार, ईरान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल प्रभाव से फिर से खोल देगा। इसके बदले में, अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा लेगा। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और उन्होंने भी इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। शरीफ ने ही इन शर्तों की पुष्टि की है। ट्रंप का यह बयान उनके प्रशासन की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें ईरान पर अत्यधिक दबाव बनाकर उसे समझौते के लिए मजबूर किया गया है। फिलहाल 60 दिनों की यह अवधि दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।