2029 तक बंद रहेगा होर्मुज! मुज्तबा की बिसात पर कैसे फंसे ट्रंप?

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2029 तक बंद रहेगा होर्मुज! मुज्तबा की बिसात पर कैसे फंसे ट्रंप?
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समुद्र की लहरों पर तैरती महाशक्ति आज बेबस खड़ी है। दुनिया को झुकाने का दावा करने वाला अमेरिका फारस की खाड़ी में लाचार नजर आ रहा है। लाख कोशिशें और बेहिसाब सैन्य ताकत होने के बावजूद होर्मुज की संकरी नसें बंद पड़ी हैं। ईरान का अदृश्य चक्रव्यूह टूट नहीं रहा है और इसके कारण ग्लोबल इकोनॉमी का गला घुट रहा है। अब ईरान होर्मुज में ऐसा इतिहास लिखने जा रहा है, जो अमेरिका की लाचारी का जीवंत दस्तावेज बनकर सदियों तक सुनाया जाएगा। सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई अमेरिका से युद्ध जीतने का फाइनल खांका खींच चुके हैं, जिसके केंद्र में होर्मुज को 2029 तक बंद करने की रणनीति छिपी है।

ट्रंप का कार्यकाल और होर्मुज पर स्थायी ताला

भीषण बमबारी, पूर्ण विनाश और सभ्यता का अंत जैसे शब्दों का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर ईरान को धमकाने के लिए करते रहे हैं। लेकिन अब ट्रंप के पास जो कुछ बचा है, वह सिर्फ यह कहना है कि आपको पता चल जाएगा। ट्रंप का यह रुख बताता है कि ईरान पर उनके तेवर अब ढीले पड़ने लगे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज है, जिस पर 2029 तक स्थायी ताला लग सकता है। इजरायल से आ रही रिपोर्ट्स ने अमेरिका और पूरे विश्व को चिंता में डाल दिया है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे ट्रंप के साथ किसी भी समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। ईरान अब ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। ट्रंप का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा और तब तक ईरान सिर्फ प्रतीक्षा की स्थिति में रह सकता है। ईरान का मानना है कि हालात उसके पक्ष में हैं और वह ट्रंप के साथ समझौता करने के बजाय उन्हें मात दे सकता है।

मैरीटाइम ट्रैफिक डेटा और ट्रंप के दावों की हकीकत

ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि होर्मुज खुला है और ईरानी माइन्स हटा दी गई हैं। लेकिन मैरीटाइम ट्रैफिक डेटा बता रहा है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। मैरीटाइम ट्रैफिक फर्म KPLER की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 5 दिन में होर्मुज से कुल 42 जहाज गुजरे हैं। युद्ध से पहले इसी मार्ग से रोजाना 130 से 140 जहाज गुजरते थे, जिनमें तेल टैंकर और वाणिज्यिक जहाज शामिल थे। यह डेटा स्पष्ट करता है कि ट्रंप की कथनी और हकीकत में बड़ा फर्क है। ईरान इसी आधार पर ट्रंप से 2029 तक तनाव जारी रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

ट्रंप के 3 विकल्प और मुज्तबा की काट

डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ 3 विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन हर विकल्प की काट मुज्तबा के पास मौजूद है। ट्रंप के पास पहला विकल्प बड़े हमले करने का है, लेकिन वे इसे लंबे समय तक जारी नहीं रख सकते क्योंकि ईरान इसका जवाब अरब देशों पर हमले करके देगा। अमेरिका के पास इन देशों के बचाव के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर नहीं हैं। दूसरा विकल्प आर्थिक दबाव बढ़ाना है, लेकिन ईरान दशकों से इसे झेल रहा है और अमेरिका उसे तोड़ नहीं पाया है और तीसरा विकल्प यथास्थिति बरकरार रखना है, लेकिन ऐसे में होर्मुज कभी नहीं खुलेगा और ट्रंप को ईरानी शर्तें मानने के लिए विवश होना पड़ेगा। यही वजह है कि ईरान 2029 तक तनाव जारी रखने के लिए तैयार है।

वैकल्पिक मार्गों की तलाश और तेल संकट

NBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप को चेतावनी दी है कि होर्मुज पर नियंत्रण का कोई भी ऑपरेशन लंबा, खर्चीला और खूनी होगा और इससे दुनिया में तेल संकट और गहरा सकता है। अब इस संकट को खत्म करने के लिए अमेरिका होर्मुज के वैकल्पिक मार्गों को विस्तार देने पर काम कर रहा है। UAE और सऊदी अरब में नए ऑयल रूट पर काम जारी है। इराक भी दो नई तेल पाइपलाइन बनाने की तैयारी कर रहा है। पहली पाइपलाइन इराक के बसरा से शुरू होकर तुर्किए के रास्ते भूमध्य सागर तक जाएगी। यह पाइपलाइन करीब 1200 से 1300 किमी लंबी होगी और इसकी क्षमता 22 लाख 50 हजार बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है।

इराक की नई पाइपलाइन योजना

इराक की यह पाइपलाइन बसरा से हदीथा पहुंचेगी, जहाँ मुख्य पंपिंग स्टेशन है। वहां से यह उत्तर की ओर सलाहुद्दीन प्रांत के बैजी रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स तक जाएगी और फिर किर्कुक-फिशखाबूर पाइपलाइन से जुड़कर तुर्किए के सीहान पोर्ट तक पहुंचेगी। इसके अलावा, इराक हदीथा-बनियास पाइपलाइन भी तैयार करने वाला है। यह पाइपलाइन इराक के हदीथा से शुरू होकर सीरिया के बनियास बंदरगाह तक जाएगी, जो भूमध्य सागर पर स्थित है। इस पाइपलाइन की लंबाई 850 से 900 किमी होगी और इसकी क्षमता लगभग 15 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन होगी। इन पाइपलाइनों के तैयार होने के बाद होर्मुज पर निर्भरता कम हो जाएगी। हालांकि, युद्ध छिड़ने पर ईरान इन वैकल्पिक रास्तों को भी निशाना बना सकता है। वह सऊदी की पाइपलाइनों पर हूती के जरिए और इराक की पाइपलाइनों पर स्थानीय मिलिशिया के जरिए हमले करवा सकता है। स्पष्ट है कि युद्धनीति में ईरान फिलहाल अमेरिका से एक कदम आगे नजर आ रहा है।

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