अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते और होर्मुज की नाकाबंदी को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान डील से जुड़े 5 राज खोले हैं, जो इस समय वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज की नाकाबंदी 7 सितंबर तक खत्म हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि इस फैसले से उन्हें कुछ व्यक्तिगत नुकसान हो सकता है, लेकिन वे इसकी परवाह नहीं करते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।
समझौते में देरी के दो मुख्य कारण
राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान विस्तार से बताया कि ईरान के साथ परमाणु समझौते में देरी क्यों हो रही है। उनके अनुसार, इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला कारण इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहा भीषण विवाद है। ट्रंप ने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस लड़ाई से काफी परेशान हो चुके हैं और इस अस्थिरता के कारण डील की प्रक्रिया धीमी हो गई है। दूसरा बड़ा कारण समझौते की बातचीत में मुज्तबा खामेनेई का शामिल होना है। ट्रंप ने बताया कि मुज्तबा तक संदेश पहुंचने में काफी समय लग रहा है, जिसके कारण अंतिम निर्णय लेने में देरी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुज्तबा वर्तमान में इस पूरी डील का नेतृत्व कर रहे हैं और वे भविष्य में उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहेंगे।
इजराइल की सुरक्षा और परमाणु हथियारों पर रुख
ईरान पर किए गए हमलों का बचाव करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमला नहीं किया जाता, तो इजराइल पूरी तरह से बर्बाद हो जाता। ट्रंप के मुताबिक, इजराइल के अस्तित्व को बचाने के लिए ईरान की सैन्य शक्ति को नियंत्रित करना अनिवार्य था और उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान परमाणु शक्ति संपन्न हो जाता है, तो इजराइल का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि युद्ध के बाद की स्थितियों ने अब यह तय कर दिया है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
तेल की कीमतें और आर्थिक प्रभाव
आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए ट्रंप ने तेल की कीमतों और शेयर बाजार का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब युद्ध की शुरुआत हुई थी, तब ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थीं कि कच्चे तेल की कीमत 400 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है और अभी कच्चा तेल 98 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बिक रहा है। ट्रंप ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक शेयर बाजार को भी इस तनाव से कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उनके अनुसार, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए यह आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है, भले ही इसके लिए कुछ कड़े कदम उठाने पड़ें।
सैन्य रणनीति और मुज्तबा खामेनेई की भूमिका
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अब वहां सेना भेजने या कब्जा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के जरिए ईरान की सैन्य व्यवस्था को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की वर्तमान स्थिति ऐसी नहीं है कि वहां जमीनी सैनिकों को भेजने की जरूरत पड़े। इसके साथ ही, उन्होंने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की प्रशंसा करते हुए उन्हें काफी समझदार बताया। ट्रंप ने कहा कि मुज्तबा खुद बातचीत की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
इससे पहले, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अमेरिकी कांग्रेस को मुज्तबा खामेनेई के बारे में महत्वपूर्ण अपडेट दिया था। रुबियो ने पुष्टि की थी कि मुज्तबा पूरी तरह से स्वस्थ हैं और ईरान की ओर से बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं और दूसरी ओर, ईरान की अर्द्ध सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि अमेरिका द्वारा परमाणु समझौते के लिए भेजे गए नए प्रस्ताव की ईरान में समीक्षा की जा रही है। ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका एक तरफ सैन्य दबाव बनाए हुए है और दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्तों से ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।