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ट्रंप का बड़ा धमाका: क्या अब अमेरिका का होगा ग्रीनलैंड? वायरल फोटो से मचा हड़कंप

ट्रंप का बड़ा धमाका: क्या अब अमेरिका का होगा ग्रीनलैंड? वायरल फोटो से मचा हड़कंप
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<iframe src="https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/115925897257210763/embed" class="truthsocial-embed" style="max-width: 100%; border: 0" width="600" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe><script src="https://truthsocial.com/embed.js" async="async"></script>अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। इस बार मामला ग्रीनलैंड को लेकर है, जिसे ट्रंप लंबे समय से अमेरिकी क्षेत्र बनाने की इच्छा जताते रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक ऐसी तस्वीर साझा की है जिसने न केवल डेनमार्क बल्कि पूरे यूरोप में चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस तस्वीर में ट्रंप को ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर गर्व से अमेरिकी झंडा गाड़ते हुए दिखाया गया है। यह महज एक तस्वीर नहीं है, बल्कि इसे ट्रंप की भविष्य की विदेश नीति के एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

ट्रुथ सोशल पर वायरल तस्वीर का सच

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा की गई इस तस्वीर में उनके साथ जेडी वेन्स और मार्क रुबियो भी नजर आ रहे हैं। तस्वीर में सबसे चौंकाने वाली बात एक बोर्ड है जिस पर लिखा है, ग्रीनलैंड- यूएस क्षेत्र- EST 2026। यह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन 2026 तक ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने का लक्ष्य रख सकता है। हालांकि यह तस्वीर एआई जनित या प्रतीकात्मक लग रही है, लेकिन ट्रंप का इसे आधिकारिक रूप से साझा करना उनके इरादों को स्पष्ट करता है। इससे पहले भी 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड को। खरीदने की इच्छा जताई थी, जिसे डेनमार्क ने एक मजाक बताकर खारिज कर दिया था।

डेनमार्क और यूरोप में बढ़ी बेचैनी

ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क साम्राज्य के भीतर एक स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप की इस पोस्ट के बाद डेनमार्क के राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन हैं और डेनमार्क ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और वहां के लोग अपनी स्वायत्तता को लेकर बेहद गंभीर हैं। ट्रंप की इस नई हरकत ने अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है, जिससे नाटो के भीतर भी दरार पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

NORAD विमानों की रणनीतिक तैनाती

इस विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य घटनाक्रम भी सामने आया है। अमेरिका अब ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस पर नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) के विमान तैनात करने की योजना बना रहा है और हालांकि NORAD ने इसे एक नियमित और पूर्व-नियोजित गतिविधि बताया है, लेकिन समय को देखते हुए इसे ट्रंप के दावों से जोड़कर देखा जा रहा है। यह बेस आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। NORAD का कहना है कि यह कार्रवाई डेनमार्क और ग्रीनलैंड के समन्वय से की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने का एक तरीका हो सकता है।

ग्रीनलैंड क्यों है ट्रंप के लिए इतना खास?

ग्रीनलैंड का महत्व केवल उसकी विशाल जमीन तक सीमित नहीं है। यह द्वीप प्राकृतिक संसाधनों, विशेष रूप से दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Minerals) का भंडार है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण जैसे-जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं जो व्यापार और सैन्य रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप इसे अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक शक्ति बढ़ाने के एक बड़े अवसर के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण से अमेरिका रूस और चीन के बढ़ते आर्कटिक प्रभाव को प्रभावी ढंग से चुनौती दे सकेगा।

भविष्य की कूटनीतिक चुनौतियां

अगर ट्रंप वास्तव में 2026 तक ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े कूटनीतिक विवादों में से एक होगा। इसके लिए न केवल डेनमार्क की सहमति की आवश्यकता होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों में भी बड़े बदलाव करने होंगे। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप का यह कदम केवल एक सोशल मीडिया स्टंट है या इसके पीछे कोई गंभीर विधायी और सैन्य रणनीति छिपी है। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस के अगले आधिकारिक बयान पर टिकी हैं।

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