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: ईरान की रिफाइनरी पर UAE का सीक्रेट हमला: क्या खाड़ी युद्ध में हुई सीधी एंट्री?

- ईरान की रिफाइनरी पर UAE का सीक्रेट हमला: क्या खाड़ी युद्ध में हुई सीधी एंट्री?
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ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे भीषण तनाव के बीच अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नाम भी इस संघर्ष में प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालिया रिपोर्ट्स में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि UAE ने चुपचाप ईरान पर सैन्य हमले किए हैं, जिससे इस क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और अधिक जटिल हो गई है और वॉल स्ट्रीट जनरल की एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावान आइलैंड स्थित एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी को अपना निशाना बनाया था। यह सैन्य कार्रवाई अप्रैल की शुरुआत में अंजाम दी गई थी, और गौर करने वाली बात यह है कि यह हमला ठीक उसी समय हुआ जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे थे। इस गुप्त हमले ने न केवल ईरान की ऊर्जा अवसंरचना को चोट पहुंचाई, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों को भी पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

रिफाइनरी पर हमले के परिणाम और ईरान की जवाबी कार्रवाई

लावान आइलैंड स्थित तेल रिफाइनरी पर हुए इस हमले के परिणाम अत्यंत गंभीर रहे। हमले के तुरंत बाद रिफाइनरी परिसर में एक भीषण आग लग गई, जिसने संयंत्र के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। इस तबाही के कारण रिफाइनरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कई महीनों के लिए पूरी तरह से बंद करना पड़ा, जिससे ईरान के तेल उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा। उस समय ईरान ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए कहा था कि उसकी रिफाइनरी पर 'दुश्मन' द्वारा हमला किया गया है और इस हमले के प्रतिशोध में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया और संयुक्त अरब अमीरात तथा कुवैत की दिशा में कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इस पूरी घटनाक्रम से नाराज नहीं था, बल्कि उसने खामोशी के साथ UAE और अन्य खाड़ी देशों द्वारा दी जा रही इस सैन्य मदद का स्वागत किया।

UAE की सैन्य भागीदारी और बदलती रक्षा नीति

यदि इन रिपोर्ट्स के दावों को सही माना जाए, तो इसका सीधा अर्थ यह है कि संयुक्त अरब अमीरात अब इस क्षेत्रीय युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो चुका है। हालांकि, UAE ने अब तक सार्वजनिक रूप से इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। UAE के विदेश मंत्रालय ने इस विषय पर एक नपा-तुला बयान देते हुए केवल इतना कहा कि देश को अपने खिलाफ होने वाले किसी भी हमले का जवाब देने का पूरा अधिकार है, और इस जवाब में सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव है। इससे पहले खाड़ी देशों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देंगे। लेकिन युद्ध की शुरुआत के बाद जब ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले शुरू किए, तो स्थिति बदल गई। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने UAE पर 2800 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिससे वहां के एयरपोर्ट, ऊर्जा ठिकानों, पर्यटन और रियल एस्टेट कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है।

सैन्य सहयोग और आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल

ईरान के लगातार हो रहे हमलों के बाद संयुक्त अरब अमीरात के रवैये में एक स्पष्ट कठोरता देखी जा रही है। अब वह ईरान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है। इसी कारण UAE ने अमेरिका के साथ अपने सैन्य सहयोग को और अधिक विस्तार दिया है और मार्च के महीने से ही युद्ध में UAE की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई थीं। उस दौरान ईरान के हवाई क्षेत्र के ऊपर ऐसे लड़ाकू विमान देखे गए थे, जो न तो अमेरिकी थे और न ही इजराइली। कुछ स्वतंत्र रिसर्चर्स ने दावा किया कि वे फ्रांसीसी मूल के मिराज फाइटर जेट और चीनी निर्मित विंग लूंग ड्रोन थे। उल्लेखनीय है कि इन दोनों ही घातक हथियारों का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात की वायुसेना द्वारा किया जाता है।

कूटनीतिक दबाव और भविष्य की रणनीति

संयुक्त अरब अमीरात के पास वर्तमान में आधुनिक F-16 लड़ाकू विमान, मिराज जेट, उन्नत ड्रोन प्रणाली, एयर सर्विलांस सिस्टम और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों का एक शक्तिशाली बेड़ा मौजूद है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में UAE की एयरफोर्स को सबसे मजबूत और सक्षम माना जाता है। सैन्य कार्रवाई के अलावा, UAE ने ईरान पर कूटनीतिक स्तर पर भी सख्ती दिखाई है और उसने संयुक्त राष्ट्र में उस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया, जिसमें जरूरत पड़ने पर होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को खत्म करने के लिए बल प्रयोग की बात कही गई थी। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर भी कड़े कदम उठाते हुए UAE ने दुबई में ईरान से जुड़े स्कूलों और क्लबों को बंद कर दिया है और ईरानी नागरिकों के लिए वीजा नियमों को अत्यंत सख्त बना दिया है। ईरान लगातार UAE पर अमेरिका और इजराइल का सक्रिय साथ देने का आरोप लगा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई है।

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