उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड फेयर की तारीखों का ऐलान, सीएम योगी ने विनिर्माण क्षमता को बताया ग्लोबल प्लेटफॉर्म

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उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड फेयर की तारीखों का ऐलान, सीएम योगी ने विनिर्माण क्षमता को बताया ग्लोबल प्लेटफॉर्म
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड फेयर की तारीखों की आधिकारिक घोषणा कर दी है और मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस साल 25 सितंबर से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण आयोजन ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में संपन्न होगा और मुख्यमंत्री ने इस ट्रेड फेयर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन राज्य की विनिर्माण क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा। इस आयोजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश अपनी औद्योगिक शक्ति का प्रदर्शन दुनिया के सामने करेगा।

विनिर्माण क्षमता और निर्यात को मिलेगा वैश्विक विस्तार

मुख्यमंत्री ने ट्रेड फेयर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी का यह चौथा संस्करण होगा। 25 से 29 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में प्रदर्शक और विदेशी खरीदार हिस्सा लेंगे। इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें पूरे उत्तर प्रदेश में निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया जाएगा और यह आयोजन न केवल उत्पादों के प्रदर्शन का माध्यम बनेगा, बल्कि कंपनियों के बीच (बी2बी) और कंपनियों तथा ग्राहकों के बीच (बी2सी) महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन बैठकों से नए निर्यात ऑर्डर को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलेगा। पिछले आयोजनों की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सत्रों में दुनिया भर से लोग शामिल हुए थे और राज्य के उत्पादों को कई अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर प्राप्त हुए थे।

निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा गौतम बुद्ध नगर

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि गौतम बुद्ध नगर आज देश में निवेश के लिए सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने इस बड़े बदलाव का श्रेय भारतीय जनता पार्टी की सरकार के तहत बेहतर हुई कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के निरंतर विकास को दिया। अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम किसी भी राज्य की औद्योगिक वृद्धि की रीढ़ होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए एमएसएमई क्षेत्र का विकास अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था और कुल निर्यात में निरंतर योगदान दे रही हैं।

नोएडा प्राधिकरण को डिजिटल सेवाओं और विकास के निर्देश

प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने नोएडा प्राधिकरण को अपनी सभी सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल बनाने के कड़े आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण को अपनी सेवाओं को ऑनलाइन करना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके साथ ही, उन्होंने उन आवंटियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जो आवंटित जमीन पर विकास कार्य करने में विफल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा प्राधिकरण को एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र के माध्यम से सभी कार्यों की निगरानी करनी चाहिए ताकि विकास की गति को सुनिश्चित किया जा सके।

यह घोषणाएं नोएडा और दादरी विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गईं, जहां मुख्यमंत्री ने 2479 करोड़ रुपये की लागत वाली 70 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी जैसे आयोजनों से उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूती मिलेगी और राज्य वैश्विक मानचित्र पर एक औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा।

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