अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि ये हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर किए गए हैं और यह सैन्य कार्रवाई उस समय हुई है जब दोनों देशों के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता टूटने की कगार पर है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने संघर्ष-विराम का उल्लंघन करते हुए एक तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिसके जवाब में यह कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान के बीच हालिया समझौते के बावजूद यह लगातार दूसरे दिन की सैन्य कार्रवाई है।
तेल टैंकर M/T किकु पर ड्रोन हमला
ताजा विवाद की शुरुआत शनिवार तड़के हुई, जब पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T किकु पर एक 'वन-वे अटैक ड्रोन' से हमला किया गया। यह टैंकर 2 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहा था। अमेरिकी सेना के अनुसार, यह हमला सुबह लगभग 4 बजकर 30 मिनट (ET) पर हुआ। इस हमले को सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि शुक्रवार को हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के पास शांति बनाए रखने का मौका था, लेकिन उसने ताजा हमले से तनाव बढ़ाने का रास्ता चुना।
ईरान के सरकारी टीवी चैनल IRIB ने भी होर्मुज स्ट्रेट के उत्तर में धमाकों की जानकारी दी है। सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दक्षिणी शहर सिरिक के पास एक टेलीकम्युनिकेशन टावर से कई प्रोजेक्टाइल टकराए, जिससे तेज धमाके हुए। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक नुकसान का पूरा विवरण साझा नहीं किया गया है। अमेरिकी सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के पास समझौते का सम्मान करने का मौका था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे पर प्रहार
ईरान की आक्रामकता का जवाब देने के लिए अमेरिकी सेना ने उसके रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इस एयर स्ट्राइक में ईरान के सैन्य निगरानी इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं और माइन-लेयरिंग क्षमताओं को तबाह कर दिया गया। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कम करना है जिनका उपयोग वह वाणिज्यिक जहाजों को रोकने या उन पर हमला करने के लिए करता है।
सेंटकॉम ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी है और अमेरिकी सेना किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क, घातक और तैयार है और यह कार्रवाई दर्शाती है कि अमेरिका वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कमांड ने कहा कि ईरानी सेना द्वारा बिना किसी वजह के की गई आक्रामकता ने साफ तौर पर सीजफायर का उल्लंघन किया है।
M/V एवर लवली और पुराना विवाद
यह तनाव केवल शनिवार की घटना तक सीमित नहीं है। इससे पहले शुक्रवार को भी अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार साइटों पर हमले किए थे। वे हमले 25 जून को होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज M/V एवर लवली पर हुए कथित ईरानी ड्रोन हमले का जवाब थे। वाशिंगटन का कहना है कि ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और इस महीने की शुरुआत में हुए सीजफायर समझौते की धज्जियां उड़ा रहा है।
अमेरिकी सेना ने कहा कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक पर निगरानी जारी रखी जाएगी ताकि समझौते का पालन सुनिश्चित किया जा सके। ईरान द्वारा बिना किसी उकसावे के की गई यह आक्रामकता क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रही है और अमेरिकी सेना समझौते का पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
जेडी वेंस की चेतावनी: हिंसा का जवाब हिंसा
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ईरान ने सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका ने उसका सम्मान किया है। वेंस ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर उन्हें इस बात पर कोई असहमति है कि MOU को कैसे लागू किया जा रहा है, तो वे फोन कर सकते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कार्रवाई के संकेत पहले ही दे दिए थे। " अब इन हमलों के बाद यह साफ हो गया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान की हरकतों पर मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। इस सैन्य कार्रवाई ने सीजफायर पर भारी दबाव डाल दिया है और आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।