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मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने बेचे 23.5 अरब डॉलर के हथियार

मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने बेचे 23.5 अरब डॉलर के हथियार
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5 अरब डॉलर के बड़े हथियार सौदों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया है जब क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं में वृद्धि हुई है और अमेरिकी विदेश विभाग ने इन सौदों को क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और सहयोगियों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया है।

मिडिल-ईस्ट में सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि

क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि 28 फरवरी को इजरायली सेना और अमेरिकी सहयोग से तेहरान पर हुए हमले के बाद देखी गई। रिपोर्टों के अनुसार, इस सैन्य अभियान के बाद ईरान ने इजरायल और मिडिल-ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य व ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू कर दी। इन हमलों ने खाड़ी देशों की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और इसी सुरक्षा अनिश्चितता के बीच अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों के लिए रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति तेज कर दी है।

23.5 अरब डॉलर के हथियार सौदों का विवरण

5 अरब डॉलर के इस रक्षा सौदे को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है। 5 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त, ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए लगभग 7 अरब डॉलर के अलग रक्षा सौदों को हरी झंडी दिखाई है। इन सौदों में उन्नत मिसाइल इंटरसेप्टर, रडार तकनीक और विमानों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सऊदी अरब और कुवैत को मिलने वाली सैन्य सामग्री

4 अरब डॉलर के सैन्य उपकरण प्राप्त होंगे। 22 अरब डॉलर की 400 AMRAAM मिसाइलें और 644 मिलियन डॉलर के F-16 गोला-बारूद व अपग्रेड शामिल हैं। वहीं, कुवैत को 8 अरब डॉलर के हथियार दिए जाएंगे, जिनमें उच्च गति वाले लक्ष्यों को ट्रैक करने वाले लोअर-टियर एयर और मिसाइल डिफेंस सेंसर रडार प्रमुख हैं। 5 मिलियन डॉलर के विमान और गोला-बारूद की आपूर्ति की जाएगी।

UAE के लिए पैट्रियट मिसाइलें और चिनूक हेलीकॉप्टर

6 अरब डॉलर आंकी गई है। 32 अरब डॉलर की लागत से चिनूक हेलीकॉप्टर भी प्रदान किए जाएंगे। ये प्रणालियां विशेष रूप से हवाई हमलों और बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए डिजाइन की गई हैं, जो वर्तमान क्षेत्रीय खतरों को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

अमेरिकी रक्षा उद्योग और आर्थिक प्रभाव

इन बिक्री समझौतों से अमेरिकी रक्षा उद्योग को बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ होने की संभावना है। पेंटागन के अनुसार, इन प्रणालियों की बिक्री से विदेशी सेनाएं आने वाले दशकों तक अमेरिकी प्रशिक्षण, स्पेयर पार्ट्स और सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहेंगी। उदाहरण के लिए, 2025 में सऊदी अरब के साथ हुए एक समझौते में अमेरिकी तकनीकी कंपनियों से 80 अरब डॉलर के संयुक्त उद्यम की प्रतिबद्धता शामिल थी। इसके अलावा, संघर्ष में ड्रोन और एआई (AI) के बढ़ते उपयोग से पालान्टिर टेक्नोलॉजीज (Palantir Technologies) जैसी कंपनियों की मांग बढ़ी है, जिसका सॉफ्टवेयर क्षेत्रीय हमलों के समन्वय में उपयोग किया जा रहा है।

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