संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के बीच के संबंधों को दुनिया के सबसे मजबूत और रणनीतिक गठबंधनों में से एक माना जाता है और हालांकि, एक हालिया खुफिया आकलन ने इस साझेदारी पर चिंता के बादल खड़े कर दिए हैं। एनबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन को इस बात की गहरी आशंका है कि इजराइल, एक करीबी सहयोगी होने के बावजूद, ईरान पर अमेरिका की नीति और युद्ध से जुड़ी आंतरिक रणनीतियों के बारे में संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है और इस संदेह ने अमेरिकी अधिकारियों के इजराइल दौरे के दौरान उनके व्यवहार और सुरक्षा प्रोटोकॉल में एक बड़ा बदलाव ला दिया है।
डीआईए का खुफिया आकलन और अत्यंत गंभीर खतरा
अमेरिकी रक्षा विभाग की प्रमुख खुफिया शाखा, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने इजराइल से जुड़े खुफिया खतरे के अपने आकलन को अपडेट किया है। एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, डीआईए ने इजराइल के लिए खतरे के स्तर को बढ़ाकर क्रिटिकल यानी अत्यंत गंभीर कर दिया है। यह स्तर अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के बीच बढ़ती चिंता की गंभीरता को दर्शाता है। डीआईए ने इस संबंध में सात पन्नों का एक विस्तृत दस्तावेज भी तैयार किया है, जिसमें उन विशिष्ट घटनाओं और व्यवहारों का उल्लेख किया गया है जिनसे यह चिंता पैदा हुई है। इस दस्तावेज में संकेत दिया गया है कि इजराइल विशेष रूप से उन आंतरिक चर्चाओं की जानकारी हासिल करने में रुचि रखता है जो अमेरिका ईरान के साथ मौजूदा तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच कर रहा है।
सुरक्षा उपाय: बर्नर फोन और क्लीन लैपटॉप का उपयोग
इन बढ़ती चिंताओं के कारण, इजराइल जाने वाले अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों को अब सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अमेरिकी अधिकारी अब बर्नर फोन यानी अस्थायी मोबाइल फोन और क्लीन लैपटॉप का उपयोग करते हैं, जिनमें कोई संवेदनशील व्यक्तिगत या सरकारी डेटा नहीं होता है। इन उपायों का उद्देश्य किसी भी संभावित अनधिकृत पहुंच से गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना है। इसके अलावा, अधिकारियों को अत्यधिक सावधानी बरतने और अपने होटल के कमरों के भीतर कोई भी महत्वपूर्ण या गोपनीय बातचीत करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन स्थानों को सुरक्षा के लिहाज से असुरक्षित माना जा सकता है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इजराइल खुफिया जानकारी जुटाने में काफी आक्रामक माना जाता है, इसलिए सहयोगियों के बीच भी ये अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम वार्ता का संदर्भ
यह तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी प्रशासन और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और राजनयिक बातचीत को लेकर चर्चा चल रही थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ हफ्ते पहले जब यह बातचीत चल रही थी, तब इजराइल को इन चर्चाओं की पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में इजराइल ने क्षेत्रीय नेताओं और अन्य राजनयिकों के माध्यम से जानकारी जुटाने की कोशिश की। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सहयोगी देशों के बीच खुफिया जानकारी जुटाना एक आम बात है, लेकिन इजराइल की हालिया गतिविधियों ने पेंटागन और डीआईए को औपचारिक रूप से सतर्क कर दिया है।
आधिकारिक खंडन और ऐतिहासिक मामले
रिपोर्ट में किए गए दावों के बावजूद, व्हाइट हाउस और इजराइल दोनों ने इन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत बताया है, जबकि इजराइली दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह अमेरिकी संस्थानों या सरकारी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता है। हालांकि, यह रिपोर्ट उन ऐतिहासिक मामलों की भी याद दिलाती है जो आज भी अमेरिकी दृष्टिकोण को प्रभावित करते हैं। इसमें 1980 के दशक के जोनाथन पोलार्ड मामले का जिक्र है, जिन्हें इजराइल को गुप्त दस्तावेज देने के लिए 30 साल की जेल हुई थी। साथ ही, 2013 में एडवर्ड स्नोडेन के खुलासों ने यह भी दिखाया था कि अमेरिका खुद अपने सहयोगियों की जासूसी करता रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय खुफिया संचालन की जटिल प्रकृति को दर्शाता है।