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तेल बाजार में अमेरिका का दबदबा: 1943 के बाद पहली बार बनेगा नेट एक्सपोर्टर

तेल बाजार में अमेरिका का दबदबा: 1943 के बाद पहली बार बनेगा नेट एक्सपोर्टर
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ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई रुकने के कारण अमेरिका से कच्चे तेल की मांग में भारी तेजी आई है। इस स्थिति के चलते अमेरिका साल 1943 के बाद फिर से कच्चे तेल का नेट एक्सपोर्टर (शुद्ध निर्यातक) बनने के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध को जल्द रोकने के बयानों के बीच, पिछले हफ्ते अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बेहद करीब दिखा।

वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन पर असर

एशियाई और यूरोपीय खरीदारों की मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका से शिपमेंट रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है और ईरान युद्ध के कारण मध्य पूर्व से रुकी हुई सप्लाई की भरपाई के लिए खरीदार तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहे हैं, जिसका सीधा लाभ अमेरिका को मिल रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच के तनाव ने ग्लोबल ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। ईरान की धमकियों के कारण दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तेल और गैस सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना बंद हो गई है। एशिया और यूरोप के रिफाइनर, जो इस सप्लाई पर निर्भर थे, अब अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक अमेरिका से तेल की मांग में उछाल आया है।

1943 के बाद पहली बार ऐतिहासिक आंकड़े

अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले हफ्ते कच्चे तेल का नेट इंपोर्ट (आयात और निर्यात का अंतर) घटकर मात्र 66,000 बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह साल 2001 से उपलब्ध साप्ताहिक आंकड़ों में अब तक का सबसे निचला स्तर है। 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो पिछले सात महीनों में सबसे अधिक है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका आखिरी बार साल 1943 में कच्चे तेल का शुद्ध निर्यातक बना था। रयस्टैड के तेल बाजार मामलों के उपाध्यक्ष, जानिव शाह के अनुसार, अमेरिका के बढ़ते निर्यात से स्पष्ट है कि अटलांटिक और एशियाई खरीदार उपलब्ध सप्लाई के लिए दूर-दूर तक पहुंच बना रहे हैं।

निर्यात के प्रमुख गंतव्य और खरीदार देश

4 मिलियन बैरल प्रतिदिन) यूरोप भेजा गया। 49 मिलियन बैरल प्रतिदिन) तेल एशिया की ओर गया, जो पिछले साल के 30% से अधिक है। ग्रीस जैसे देशों ने हाल के महीनों में पहली बार अमेरिका से कच्चा तेल खरीदा है। अमेरिका के टॉप खरीदारों में नीदरलैंड, जापान, फ्रांस, जर्मनी और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। इसके अलावा, 500,000 बैरल कच्चे तेल से भरा एक जहाज तुर्की की ओर जाते हुए देखा गया है, जो कम से कम एक साल में तुर्की को अमेरिका का पहला निर्यात होगा।

निर्यात क्षमता और भविष्य की सीमाएं

2 मिलियन bpd तक पहुंच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अब अपनी अधिकतम निर्यात क्षमता के करीब पहुंच रहा है। सीमित पाइपलाइन क्षमता और जहाजों की उपलब्धता को देखते हुए, व्यापारियों और विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अधिकतम 6 मिलियन bpd तक ही निर्यात कर सकता है।

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