अमेरिका से भारतीयों का निर्वासन: 2025 से अब तक 4,840 लोग भेजे गए वापस, विदेश मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े

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अमेरिका से भारतीयों का निर्वासन: 2025 से अब तक 4,840 लोग भेजे गए वापस, विदेश मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े
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विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से भारतीय नागरिकों के निर्वासन के संबंध में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट साझा की है। सरकार द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका उन भारतीयों को लगातार वापस भेज रहा है जो वहां अवैध रूप से रह रहे थे। यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे एक व्यापक अभियान का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन आंकड़ों की पुष्टि की और बताया कि भारत सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि हम कई देशों की सरकारों के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं ताकि प्रक्रिया को सुचारू बनाया जा सके।

निर्वासन के आधिकारिक आंकड़े

रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित प्रेस वार्ता में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि साल 2025 से अब तक कुल 4,840 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से निर्वासित किया गया है। उन्होंने इन आंकड़ों का विस्तार से विवरण देते हुए कहा कि साल 2025 में कुल 3,567 भारतीयों को वापस भेजा गया था। इसके बाद, 1 जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच 1,273 और भारतीयों को अमेरिका से भारत वापस भेजा गया है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह संख्या उन लोगों की है जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने अवैध प्रवास के कारण देश छोड़ने के लिए मजबूर किया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ट्रंप प्रशासन अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने अभियान को काफी सख्ती से लागू कर रहा है।

नागरिकता की जांच और वापसी की प्रक्रिया

निर्वासन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार किसी भी व्यक्ति को वापस लेने से पहले उसकी नागरिकता की गहन जांच करती है। उन्होंने बताया कि जब भी निर्वासन से जुड़ा कोई मामला सामने आता है, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं। " उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एक बार जब सरकार पूरी तरह से संतुष्ट हो जाती है कि व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तभी उसकी भारत वापसी की व्यवस्था की जाती है। यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि किसी भी गलत पहचान या कानूनी जटिलता से बचा जा सके।

भारतीयों के साथ व्यवहार पर भारत की चिंता

भारत सरकार ने निर्वासित किए जा रहे नागरिकों के साथ किए जाने वाले बर्ताव को लेकर भी अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बताया था कि नई दिल्ली ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस विषय पर बातचीत की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वापस भेजे जा रहे लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो। भारत ने विशेष रूप से यह अनुरोध किया था कि निर्वासन के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली उड़ानों में महिलाओं और बच्चों को हथकड़ी या जंजीरों से न बांधा जाए और सरकार का मानना है कि भले ही निर्वासन एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन इसमें मानवीय गरिमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

विशिष्ट घटनाएं और औपचारिक विरोध

निर्वासित भारतीयों के साथ दुर्व्यवहार की कुछ घटनाओं ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। साल 2025 में 73 साल की हरजीत कौर को देश से वापस भेजे जाने के दौरान उनके साथ बुरा बर्ताव किए जाने की खबरें सामने आई थीं, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके अलावा, पिछले साल फरवरी में एक निर्वासन उड़ान के दौरान महिलाओं और बच्चों को बेड़ियों या बंधन में रखने की घटना की भी कड़ी आलोचना हुई थी। इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने अमेरिकी प्रशासन के सामने औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया था। भारत लगातार यह मांग कर रहा है कि निर्वासन की पूरी प्रक्रिया को मानवीय और सम्मानजनक तरीके से संपन्न किया जाना चाहिए।

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