US Fed Rate Hike: अमेरिका में 2023 के बाद पहली बार बढ़ीं ब्याज दरें, 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
US Fed Rate Hike: अमेरिका में 2023 के बाद पहली बार बढ़ीं ब्याज दरें, 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा
विज्ञापन

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए साल 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका में लगातार बढ़ रही महंगाई पर लगाम लगाना है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की दो दिनों तक चली महत्वपूर्ण बैठक के बाद इस फैसले की घोषणा की गई, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है और यह कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि इस साल जनवरी से ही ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया गया था। केंद्रीय बैंक अब तक अर्थव्यवस्था पर महंगे कच्चे तेल और नए टैरिफ नियमों के असर का गहराई से आकलन कर रहा था।

ब्याज दरों का नया दायरा और आर्थिक प्रभाव

इस ताजा बढ़ोतरी के बाद अब अमेरिका में बेंचमार्क ब्याज दरें 3 दशमलव 75 प्रतिशत से 4 दशमलव 00 प्रतिशत की रेंज में पहुंच गई हैं। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले काफी समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया था। फेडरल रिजर्व के इस कदम का सीधा असर उधारी की लागत पर पड़ेगा। बैंक पिछले कई महीनों से वैश्विक बाजार की स्थितियों पर नजर रखे हुए था। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए नियमों ने केंद्रीय बैंक को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। 25 बेसिस पॉइंट की यह वृद्धि दर्शाती है कि फेडरल रिजर्व अब महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आक्रामक रुख अपनाने को तैयार है।

महंगाई बनी दरें बढ़ाने की मुख्य वजह

फेडरल रिजर्व का यह फैसला अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ रही महंगाई है। अगस्त महीने के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कंज्यूमर इन्फ्लेशन 3 दशमलव 4 प्रतिशत पर बना रहा। हालांकि यह आंकड़ा पिछले महीने के बराबर ही था, लेकिन यह फेडरल रिजर्व द्वारा तय किए गए 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ज्यादा है। महंगाई को कम न होने देने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं और मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिससे परिवहन और उत्पादन की लागत में इजाफा हुआ है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आए उछाल ने भी बाजार में मांग को तेजी से बढ़ा दिया है। इन सभी वजहों ने मिलकर महंगाई के दबाव को कम नहीं होने दिया। जुलाई में हुई बैठक के दौरान ही कुछ सदस्यों ने ब्याज दरें बढ़ाने की वकालत की थी, और अब ताजा आंकड़ों ने इस फैसले पर अंतिम मुहर लगा दी है।

नए फेड चीफ केविन वॉर्श का कड़ा फैसला

ब्याज दरों में की गई यह बढ़ोतरी फेड के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखी जा रही है और उन्होंने इसी साल केंद्रीय बैंक की कमान संभाली है और यह उनका पहला सबसे बड़ा नीतिगत फैसला है। पद संभालने के बाद वॉर्श ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए थे, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी। हालांकि, उन्होंने अपने बयानों में यह जरूर स्पष्ट किया था कि अगर महंगाई कम नहीं हुई, तो वह कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। अब 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के इस फैसले से उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए हैं और अपने बयान को सच साबित कर दिखाया है।

राष्ट्रपति ट्रंप की उम्मीदों को लगा झटका

फेडरल रिजर्व के इस फैसले से अमेरिका की राजनीति में भी हलचल तेज होने की संभावना है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा के बिल्कुल विपरीत है। ट्रंप ने केविन वॉर्श को इस उम्मीद के साथ नियुक्त किया था कि वह ब्याज दरों को कम रखेंगे या कम से कम स्थिर रखेंगे। ट्रंप लगातार यह मांग कर रहे थे कि देश में उधारी सस्ती होनी चाहिए ताकि आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिल सके और व्यवसायों को फलने-फूलने का मौका मिले और लेकिन जमीनी हकीकत और 3 दशमलव 4 प्रतिशत की महंगाई दर ने केंद्रीय बैंक के पास दरें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं छोड़ा। यह फैसला फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता को भी दर्शाता है, जहां आर्थिक स्थिरता को राजनीतिक प्राथमिकताओं से ऊपर रखा गया है।

विज्ञापन