अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट प्रदान की है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक आधिकारिक बयान में इस निर्णय की पुष्टि की है और यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की आशंका बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इस छूट का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और उपलब्धता को स्थिर बनाए रखना है।
व्हाइट हाउस का आधिकारिक रुख और छूट का कारण
प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा एक जिम्मेदार राष्ट्र की भूमिका निभाई है, जिसके कारण उसे यह विशेष राहत दी गई है और लेविट के अनुसार, यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस अस्थायी छूट से वैश्विक ऊर्जा बाजार में आने वाले संभावित झटकों को कम किया जा सकेगा।
वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता का लक्ष्य
अमेरिकी प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में जारी अस्थिरता के कारण तेल की आपूर्ति में कमी आ सकती है। इस कमी को पूरा करने और कीमतों में अचानक उछाल को रोकने के लिए भारत को रूसी तेल आयात करने की अनुमति दी गई है। कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तेल आपूर्ति को सुचारू रूप से संचालित करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह छूट केवल एक सीमित अवधि के लिए है और इसका उद्देश्य किसी विशेष देश को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि बाजार की जरूरतों को पूरा करना है।
भारत की भूमिका और 'गुड एक्टर' की पहचान
व्हाइट हाउस ने भारत को एक 'गुड एक्टर' (अनुशासित सहयोगी) के रूप में परिभाषित किया है। प्रेस सचिव ने उल्लेख किया कि भारत ने पूर्व में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सम्मान किया है। जब पहले भारत से रूसी तेल की खरीद कम करने या बंद करने का आग्रह किया गया था, तो भारत ने उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, भारत की इसी विश्वसनीयता और सहयोगपूर्ण रवैये के कारण उसे वर्तमान संकट के दौरान यह रियायत दी गई है और प्रशासन ने भारत के पिछले रिकॉर्ड को इस निर्णय का एक प्रमुख आधार बताया है।
रूस को होने वाले वित्तीय लाभ पर अमेरिका की टिप्पणी
इस छूट के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कैरोलिन लेविट ने कहा कि इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ होने की संभावना नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जो तेल भारत पहुंच रहा है, वह पहले से ही समुद्र में था और पारगमन की प्रक्रिया में था। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस सीमित अवधि की खरीद से रूस के युद्ध प्रयासों के लिए आवश्यक राजस्व में कोई महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं होगी। अमेरिका का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि रूस को मिलने वाले लाभ को न्यूनतम रखते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था को तेल की कमी से बचाया जा सके।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और प्रशासनिक समन्वय
इससे पूर्व, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय साझा की थी। उन्होंने कहा था कि मध्य पूर्व के संघर्ष ने तेल आपूर्ति में एक अस्थायी अंतर पैदा कर दिया है। बेसेंट के अनुसार, भारतीय पक्ष ने प्रतिबंधों के अनुपालन में बहुत अच्छा सहयोग दिखाया है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत अमेरिकी तेल के आयात की दिशा में भी कदम उठा रहा था, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें रूसी तेल लेने की अनुमति देना आवश्यक समझा गया। यह निर्णय अमेरिकी सरकार के विभिन्न विभागों के बीच पूर्ण समन्वय का परिणाम है।