भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज वोटिंग

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भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज वोटिंग
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अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स एक ऐसे महत्वपूर्ण विधायी कदम की ओर बढ़ रहा है जिसका भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है। प्रतिनिधि सभा रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक पर मतदान करने की तैयारी में है। इस विधेयक में एक विशेष प्रावधान शामिल किया गया है जिसके तहत उन देशों पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जा सकता है जो रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं। भारत, जो वर्तमान में रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार है, इस विधायी घटनाक्रम के केंद्र में है। यह कदम उन देशों के खिलाफ अमेरिका के सख्त रुख को दर्शाता है जो मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच मॉस्को के साथ ऊर्जा संबंध बनाए हुए हैं।

लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जो कानून है उसका नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 है। इस विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस के ऊपरी सदन यानी सीनेट में पहले ही भारी समर्थन मिल चुका है और पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया था। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक प्रतिनिधि सभा के सामने है और हाउस रूल्स कमेटी ने इस विधेयक को विचार के लिए आगे बढ़ा दिया है, जो इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण चरण है।

प्रतिनिधि सभा में प्रक्रियागत जीत

मंगलवार को प्रतिनिधि सभा में एक प्रक्रियागत मतदान हुआ जिसने इस विधायी निकाय की दिशा स्पष्ट कर दी। रूस प्रतिबंध विधेयक और अन्य संबंधित कानूनों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव 214-211 मतों के मामूली अंतर से पारित हो गया। यह परिणाम विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा क्योंकि दो डेमोक्रेट सांसदों ने अपनी पार्टी की लाइन से अलग जाकर रिपब्लिकन सांसदों के साथ मतदान किया। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा पैदा कर दी है। इस प्रक्रियागत सफलता ने सदन के डेमोक्रेटिक नेतृत्व को एक झटका दिया है, जो इस विधेयक की जटिलताओं को सुलझाने में जुटा था।

10 विशिष्ट देशों को बनाया गया निशाना

डेमोक्रेटिक कांग्रेसमैन स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए एक संशोधन ने इस विधेयक के दायरे को और विस्तृत कर दिया है। इस संशोधन में 10 विशिष्ट देशों की पहचान की गई है जो 100 प्रतिशत टैरिफ के पात्र हो सकते हैं। इस सूची में चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक शामिल हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह संशोधन अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता है। इसके बजाय, यदि यह विधेयक कानून बन जाता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस अधिकार का उपयोग करने का निर्णय लेते हैं, तो भारत रूस के साथ निरंतर ऊर्जा व्यापार के कारण ऐसे भारी शुल्क के लिए पात्र हो जाएगा।

शैडो फ्लीट और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाना है। इसमें विशेष रूप से उन जहाजों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिन्हें शैडो फ्लीट कहा जाता है। ये वे जहाज हैं जिनका उपयोग मौजूदा प्रतिबंधों को दरकिनार करने और रूसी तेल के व्यापार को सुगम बनाने के लिए किया जाता है और अमेरिका लगातार यह दावा करता रहा है कि रूस इन शैडो फ्लीट के माध्यम से कच्चे तेल की बिक्री से धन जुटाता है और उस पैसे का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है। रूसी ऊर्जा के सबसे बड़े खरीदारों को निशाना बनाकर अमेरिका इस वित्तीय आपूर्ति को काटना चाहता है। सीनेट द्वारा पारित संस्करण में देशों के नाम स्पष्ट नहीं थे, लेकिन हाउस संस्करण में अब भारत और चीन सहित 10 देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल किए गए हैं।

राजनीतिक विरोध और पिछले टैरिफ का इतिहास

सदन के भीतर कुछ हलकों से इस विधेयक का विरोध भी हो रहा है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य और डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी मीक्स ने सोमवार को अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को बिना किसी सुरक्षा उपाय या निरीक्षण के टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार दे देगा। यह बहस उस पृष्ठभूमि में हो रही है जहां भारत को पहले भी रूसी तेल आयात के लिए निशाना बनाया गया था। पूर्व में भारत पर 25 और 25 प्रतिशत यानी कुल 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में कम कर दिया गया था। वर्तमान में 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव व्यापारिक दंड में एक बड़ी वृद्धि का संकेत देता है।

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