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अमेरिका-ईरान सीजफायर: ट्रंप की धमकी से समझौते तक, जानें पर्दे के पीछे की पूरी कहानी

अमेरिका-ईरान सीजफायर: ट्रंप की धमकी से समझौते तक, जानें पर्दे के पीछे की पूरी कहानी
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वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नाटकीय घटनाक्रम में दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की गई है और इस समझौते से पहले वाशिंगटन के गलियारों में जो कुछ हुआ, वह किसी हाई-वोल्टेज ड्रामा से कम नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई 'सभ्यता खत्म करने' वाली चेतावनी और उसके बाद हुए समझौते के बीच की कतरनें अब सामने आने लगी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, जब दुनिया एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका से कांप रही थी, तब पर्दे के पीछे कूटनीतिक और सैन्य मशीनरी अत्यंत सक्रिय थी।

सुबह का अल्टीमेटम और पेंटागन की युद्धक तैयारी

मंगलवार की सुबह वाशिंगटन में तनाव अपने चरम पर था। सुबह 8:06 बजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा अल्टीमेटम जारी किया जिसने वैश्विक स्तर पर खलबली मचा दी। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो एक पूरी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। यह धमकी सीधे तौर पर ईरान के अस्तित्व पर प्रहार थी। इस सार्वजनिक बयान के ठीक बाद, सुबह 9:00 बजे रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू की। इस बैठक में चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन और यूएस सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान की रूपरेखा तैयार करना था। अमेरिकी सेना और पेंटागन के अधिकारी अंतिम घंटों में हमले की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक नेताओं का हस्तक्षेप

जैसे-जैसे वाशिंगटन में समय बीत रहा था, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से दबाव बढ़ने लगा। रिपोर्ट के अनुसार, पोप लियो सहित दुनिया के कई प्रभावशाली नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे संपर्क किया। इन नेताओं ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई से पीछे हटने और कूटनीति को एक और मौका देने की अपील की और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देश भी इस स्थिति को लेकर चिंतित थे। उन्हें डर था कि यदि अमेरिका हमला करता है, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगी। सहयोगी देशों ने वाशिंगटन से डेडलाइन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया ताकि बातचीत के लिए कुछ और समय मिल सके।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और क्षेत्रीय दबाव

दोपहर होते-होते क्षेत्रीय शक्तियों ने भी अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी। दोपहर 3:00 बजे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से अपील की कि वह अस्थायी युद्धविराम को स्वीकार करे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से आग्रह किया कि वह इस अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखे। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इसे बंद करने की ईरान की धमकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया था। पाकिस्तान की इस मध्यस्थता को वाशिंगटन में गंभीरता से लिया गया, क्योंकि इस्लामाबाद दोनों पक्षों के बीच एक सेतु का काम कर रहा था।

ओवल ऑफिस की हलचल और ट्रंप का सोशल मीडिया ऐलान

पूरी दोपहर राष्ट्रपति ट्रंप ओवल ऑफिस में अपने करीबी सलाहकारों के साथ विचार-विमर्श करते रहे। वह लगातार फोन कॉल्स ले रहे थे और युद्धविराम के प्रस्तावों के संभावित परिणामों का आकलन कर रहे थे। शाम 6:32 बजे ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने घोषणा की कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है, तो वह 2 सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमलों को निलंबित करने के लिए तैयार हैं। इस घोषणा ने तत्काल प्रभाव से युद्ध के बादलों को कुछ समय के लिए हटा दिया।

ईरान की प्रतिक्रिया और इस्लामाबाद वार्ता का मार्ग

ट्रंप की घोषणा के कुछ घंटों बाद, रात 9:00 बजे ईरान की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आई। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने घोषणा की कि उच्चतम स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि ईरान अगले 2 सप्ताह तक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत में शामिल होगा। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध पूरी तरह समाप्त हो गया है। तेहरान ने जोर देकर कहा कि वह केवल अपनी शर्तों के आधार पर ही स्थायी शांति को स्वीकार करेगा। इस प्रकार, एक विनाशकारी युद्ध की कगार पर खड़ी दुनिया को 14 दिनों की अस्थायी राहत मिली है, जिसके दौरान भविष्य की दिशा तय होगी।

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