अमेरिका-ईरान युद्ध और भीषण: चाबहार पोर्ट का टावर तबाह, ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को दहलाया

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
अमेरिका-ईरान युद्ध और भीषण: चाबहार पोर्ट का टावर तबाह, ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को दहलाया
विज्ञापन

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य तनातनी अब एक बेहद खतरनाक और भीषण युद्ध में तब्दील हो गई है। दोनों देशों के बीच जारी हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर यह दावा किया है कि उसने ईरान के चाबहार में स्थित शहीद कलंतरी पोर्ट के एक महत्वपूर्ण सर्विलांस टावर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई लगातार 7वीं रात की हवाई कार्रवाई का हिस्सा था। इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं और ईरान का दावा है कि उसने कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमला और उसका उद्देश्य

CENTCOM द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 16 जुलाई को अमेरिकी सेना ने चाबहार के शहीद कलंतरी पोर्ट पर स्थित सर्विलांस टावर को निशाना बनाया। अमेरिका का तर्क है कि यह टावर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समुद्री निगरानी नेटवर्क का एक मुख्य हिस्सा था। इस टावर का उपयोग पिछले कई वर्षों से ओमान की खाड़ी और विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक जहाजों की निगरानी करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य IRGC की उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिसके जरिए वे नागरिक जहाजों पर हमलों का समन्वय करते थे। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस नष्ट हुए टावर की तस्वीर भी साझा की है, जो इस हमले की गंभीरता को दर्शाता है।

ईरान में भारी तबाही और हताहतों का विवरण

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने भी इस बात की पुष्टि की है कि चाबहार पोर्ट का समुद्री नियंत्रण टावर अमेरिकी हमले में पूरी तरह तबाह हो गया है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि बंदरगाह के अन्य महत्वपूर्ण ढांचे जैसे घाट और माल ढुलाई उपकरण सुरक्षित हैं। लेकिन अमेरिका के ये हमले केवल चाबहार तक ही सीमित नहीं रहे। ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी के अनुसार, होर्मोज़गान, बुशेहर, सिस्तान-बलूचिस्तान, खुज़ेस्तान और लोरेस्तान प्रांतों में भी कई नागरिक और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इन हमलों में अब तक कम से कम 38 लोगों की जान जा चुकी है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और एक नाबालिग भी शामिल हैं। इसके अलावा, खमीर काउंटी में 6 पुलों के क्षतिग्रस्त होने से सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इनमें कोहोरेस्तान गांव के पास के 2 पुल, शोर नदी का पुल और बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थान शामिल हैं।

ईरान की जवाबी कार्रवाई: ऑपरेशन लाइटनिंग और ऑपरेशन नस्र-2

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की सेना और IRGC ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कई ऑपरेशनों की घोषणा की है। ईरानी सेना ने 'ऑपरेशन लाइटनिंग' के 13वें चरण के तहत उत्तरी हिंद महासागर में एक अमेरिकी जहाज पर तट से समुद्र में मार करने वाली क्रूज मिसाइल दागने का दावा किया है। ईरान का कहना है कि इस हमले से अमेरिकी नौसेना में हड़कंप मच गया। इसके साथ ही IRGC ने 'ऑपरेशन नस्र-2' शुरू किया है। इस ऑपरेशन के 16वें चरण में कतर स्थित अल उदैद एयर बेस को निशाना बनाया गया, जहां ईरान ने लंबी दूरी के रडार सिस्टम और अमेरिका के रणनीतिक हवाई ईंधन भरने वाले विमानों को नष्ट करने का दावा किया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपने हमले बंद नहीं किए, तो वह और भी घातक जवाबी कार्रवाई करेगा।

कुवैत, जॉर्डन और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर प्रहार

ईरान की जवाबी कार्रवाई का दायरा कुवैत और जॉर्डन तक भी फैल गया है। IRGC ने दावा किया कि 'ऑपरेशन नस्र-2' के 15वें चरण में कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर HIMARS मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया गया। जॉर्डन में भी अमेरिकी हवाई अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए, जिसमें कई लड़ाकू विमानों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। ओमान के घानेम और सलामेह रॉक्स क्षेत्रों में भी अमेरिकी रडार प्रणालियों को नष्ट करने का दावा किया गया है। इन सबके बीच, ईरान ने यह भी दोहराया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अभी भी उसकी नौसेना का पूर्ण नियंत्रण बना हुआ है।

सीरिया में अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने का विवादित दावा

इस युद्ध का एक और गंभीर पहलू सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र से सामने आया है। IRGC ने दावा किया कि 'ऑपरेशन नस्र-2' के 11वें चरण के दौरान उसने सीरिया में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड सेंटर पर अचानक हमला किया। इस हमले में रडार और हेलीकॉप्टर नष्ट करने के साथ-साथ अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाने का भी दावा किया गया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। CENTCOM का कहना है कि अल-तनफ में उनका कोई भी सैनिक न तो मारा गया है और न ही किसी को बंदी बनाया गया है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, अमेरिका और ईरान के बीच यह जंग और भी भीषण होती जा रही है, जिससे पूरी दुनिया में तेल आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

विज्ञापन